Ujjain Fake clinic: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन का दिल दहला देने वाला मामला। स्वास्थ्य विभाग के एजेडी डॉ. डीके तिवारी की लापरवाही से गई थी 11 साल की मासूम जान। माफिया से साठगांठ के चलते पहुंचे जेल, जांच में हुए खुलासे ने चौंकाया, उज्जैन में 38 में से 30 अस्पताल फर्जी
Ujjain Fake clinic: प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को उज्जैन के अतिरिक्त संयुक्त संचालक (एजेडी) डॉ. डीके तिवारी ने अपनी कारगुजारी से शर्मसार कर दिया। फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा कसने के बजाय स्वास्थ्य विभाग के एजेडी डॉ. तिवारी ने फर्जी क्लीनिक में 11 साल की बच्ची दीपिका डाबी का अपेंडिक्स का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन भी ऐसा कि उसकी मौत ही हो गई।
परिजनों के प्रदर्शन के बाद हुई जांच (Ujjain Fake clinic) में एजेडी डॉ. तिवारी व फर्जी क्लीनिक (जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक) के संचालक राजेश चौहान की भूमिका संदिग्ध मिली। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और कोर्ट ने दोनों को बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वारी 2 माह बाद रिटायर्ड होने वाले थे। प्रदेश में संभवत: यह पहला मामला है, जब संयुक्त संचालक स्तर का स्वास्थ्य अधिकारी गैर-इरादतन हत्या में जेल भेजा गया।
इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं (Ujjain Fake clinic) को सवालों के घेरे में ला दिया है। यह सवाल तब और भी बड़ा हो गया, जब जांच टीम ने उज्जैन में 38 अस्पतालों की जांच की। इनमें से महज 8 के पास ही लाइसेंस मिले। बाकी कागज नहीं दिखा सके। इससे साफ है, जान बचाने वाले जिम्मेदारों की मिलीभगत से फर्जी अस्पतालों में मौत का खेल खेला जा रहा है।
राघवी क्षेत्र के लिल्याखेड़ी गांव की 7वीं की छात्रा दीपिका पिता मेहरबान डाबी को 9 मई को सुबह जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक में भर्ती कराया गया। मंछामन स्थित राजेश चौहान के फर्जी क्लीनिक (Ujjain Fake clinic) में अतिरिक्त स्वास्थ्य संचालक डॉ. तिवारी ने बच्ची के अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने चौहान और डॉ. तिवारी पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक फर्जी (Ujjain Fake Hospital) निकला। उसका पंजीयन नहीं था। टीम ने पहले से सील क्लीनिक का ताला तोड़कर दोबारा जांच की। इलाज और सर्जरी से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। इसके बाद क्लीनिक फिर से सील कर दिया गया। ऑपरेशन थियेटर भी नियमानुसार नहीं था।
बच्ची की मौत के बाद कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने जांच कराई। सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल ने शहर और ग्रामीण क्षेत्र में जांच अभियान (Ujjain Fake clinic) शुरू करने के लिए टीमें बनाईं। शहर के आधा दर्जन अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके लिए शहर में 5 टीमें जांच कर रही हैं। बताते हैं, शहर के 38 अस्पतालों की जांच की गई है। इनमें से 8 ही रजिस्टर्ड मिले। 30 अस्पताल अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे हैं।
मामले में एक्शन लेते हुए सीएमएचओ ने जान से खिलवाड़ के आरोपों में घिरे एमपी हॉस्पिटल (Ujjain Fake clinic) का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को 3 दिन में वैध अस्पतालों में शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।