
UP Politics: गोंडा के पूर्व BJP सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के हालिया बयान को लेकर पार्टी के भीतर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उन्नाव की पुरवा विधानसभा सीट से BJP विधायक अनिल सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ब्रजभूषण शरण सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 72 वर्ष की उम्र में कई बातें भूल जाना स्वाभाविक है और किसी भी सार्वजनिक मुद्दे पर बयान देने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।
अनिल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बिना तथ्य और प्रमाण के कोई बात नहीं कहते। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री का बयान उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों पर आधारित है, जबकि ब्रजभूषण शरण सिंह की टिप्पणी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती।
BJP विधायक ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को किसी भी संवेदनशील विषय पर बोलने से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रजभूषण शरण सिंह जैसे वरिष्ठ नेता से भी यही अपेक्षा की जाती है कि वे तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अपनी राय रखें।
अनिल सिंह ने कहा कि CM योगी आदित्यनाथ की उम्र करीब 55 वर्ष है, जबकि ब्रजभूषण शरण सिंह 72 वर्ष के हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस उम्र में स्मरण शक्ति कमजोर होना असामान्य नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ब्रजभूषण शरण सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और बड़े भाई के समान हैं, इसलिए संभव है कि उन्हें घटना ठीक से याद न हो।
अनिल सिंह ने दावा किया कि हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने की घटना का रिकॉर्ड उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो बयान दिया है, वह इसी रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर दिया गया है। ऐसे में इस मुद्दे पर ब्रजभूषण शरण सिंह का दावा सही नहीं माना जा सकता।
BJP विधायक ने ब्रजभूषण शरण सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें लगभग हर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने की आदत हो गई है, चाहे मामला पार्टी से जुड़ा हो या किसी अन्य विषय से। उन्होंने कहा कि इसी कारण अब लोग उनके बयानों को पहले जैसी गंभीरता से नहीं लेते।
हालांकि बाद में गोंडा में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने को लेकर दिए गए अपने बयान पर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान पूरी तरह सही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें माफी मांगने में कोई संकोच नहीं है।
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि मीडिया ने उनसे पूछा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उसी समय उन्हें यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि नमाज सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि 52 बीघा परिसर या किसी संत के स्थान पर पढ़ी गई थी। उन्होंने कहा कि उनके जवाब के अधूरा रह जाने की वजह से ही पूरे मामले को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का पक्ष भी सही है और उनका बयान भी अपने संदर्भ में सही था।