
Congress MP Imran Masood: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों के उपवास खत्म करने के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उन पर तीखा हमला बोल दिया है। मसूद ने वांगचुक को ‘अन्ना हजारे का पार्ट 2’ बताते हुए कहा कि अब वे भी चुप हो जाएंगे। इस बयान ने सियासी घमासान मचा दिया है।
इमरान मसूद ने कहा कि सोनम वांगचुक अन्ना हजारे पार्ट टू हैं। अन्ना 12 साल से चुप हैं, अब ये भी चुप रहेंगे। कल सरकार से डील कर रहे थे, वहां कोई छात्र तो था नहीं? सिर्फ लद्दाख के लोग थे। ये उनकी व्यक्तिगत डील है सरकार के साथ। वांगचुक ने गुरुवार रात मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना उपवास तोड़ा। लद्दाख के एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मसूद के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी विपक्षी पार्टी का नहीं, बल्कि देश के युवाओं का है। दीपके ने पूछे जाने पर कि ऐसे बयान से आंदोलन कमजोर तो नहीं होगा, उन्होंने जवाब दिया, यह राष्ट्र के युवाओं का आंदोलन है, विपक्षी दलों का नहीं। यह आंदोलन कमजोर नहीं होगा।
बीजेपी ने भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस सोनम वांगचुक का अपमान कर रही है क्योंकि उन्हें क्रेडिट नहीं मिल रहा। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, कांग्रेस ने सारी हदें पार कर दीं। राहुल गांधी 21 दिन छुट्टी मनाने गए, छात्रों की चिंता नहीं की। संसद में चर्चा से भाग रहे हैं और अपने सांसदों से सोनम वांगचुक को गाली दिलवा रहे हैं। अब जब सरकार ने बातचीत की, उपवास खत्म कराया और मांग मानी, तो कांग्रेस क्रेडिट की लड़ाई लड़ रही है।
पूणावाला ने आगे कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में पेपर लीक होते हैं लेकिन वे चपरासी तक को नहीं निकालते। वहीं पीएम मोदी छात्रों के हित में लगातार काम कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक उपवास रखा। खत्म करते समय उन्होंने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अभिजीत दीपके ने वांगचुक को धन्यवाद देते हुए कहा, 26 दिनों तक अपनी जान दांव पर लगाकर आपने पूरे देश की अंतरात्मा जगाई। आपकी जिंदगी देश के लिए बहुत कीमती है। अभी देखना यह है कि यह विवाद आगे किस रूप में बढ़ता है। छात्रों का आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी दोनों ही जारी है।