
UP Assembly Elections: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। आजाद ने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे जोर-शोर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है क्योंकि राज्य में अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। वे अन्याय देखते हुए लोगों को तैयार कर रहे हैं कि इस सरकार को हटाकर आजाद समाज पार्टी की सरकार बनानी है।
चंद्रशेखर आजाद ने संभावित गठबंधन पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े वर्ग और मुसलमानों का इतना मजबूत गठबंधन ही असली गठबंधन कहलाता है। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में भाजपा सरकार सत्ता में आई और 2017 से 2026 तक बहुमत के साथ कायम है। विपक्षी दल न 2017 में जीते और न 2022 में। उस समय बने गठबंधन भाजपा को हराने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के महिला आरक्षण बिल और परिसीमन संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आजाद ने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पारित हो चुका है और कानून बन गया है। ऐसे में उस पर सहयोग की क्या बात? पार्टी ने केवल दलित, पिछड़ी, मुस्लिम और आदिवासी समुदाय की महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए संशोधन की मांग की थी। परिसीमन संवैधानिक संशोधन वाला जटिल विषय है, समय आने पर इस पर चर्चा होगी।
इस बीच आजाद समाज पार्टी ने मंडल जागरूकता आंदोलन भी शुरू किया है। चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि यह जन जागरूकता आंदोलन है। 7 अगस्त 1990 को वी.पी. सिंह द्वारा घोषित 40 सिफारिशों में से केवल दो लागू हुई हैं, बाकी 38 अभी भी लंबित हैं। जब तक ये लागू नहीं होंगी, पिछड़े और अति पिछड़े समुदाय आत्मसम्मान, गरिमापूर्ण जीवन और अवसरों से वंचित रहेंगे। इन्हीं मांगों को पूरा कराने के लिए पार्टी मंडल जागरूकता आंदोलन के तहत प्रदर्शन कर रही है।
चंद्रशेखर आजाद के इन बयानों से साफ है कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में स्वतंत्र रूप से ताकत आजमाने की रणनीति पर काम कर रही है। वे सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में जुटे हैं। मंडल आयोग की बाकी सिफारिशों को लागू कराने का मुद्दा भी पार्टी के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है। लखनऊ में दिए गए इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।