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राज्यसभा चुनाव से पहले Gen-Z पर नजर: MLC में 11 सीटों की लड़ाई, निशाने पर नई सियासी पीढ़ी

UP MLC Election 2026 : यूपी में राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद होने जा रहे 11 सीटों के विधान परिषद (MLC) चुनाव के जरिए भाजपा और सपा ने जेन-जी और युवा वोटरों को साधने का बड़ा अभियान शुरू किया है।
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Oct 03, 2026
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सीएम योगी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव। फोटो सोर्स-IANS

UP MLC Election 2026 Gen-Z Strategy BJP SP: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद प्रस्तावित विधान परिषद चुनाव सिर्फ 11 सीटों का चुनाव नहीं है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को विधायक मतदान करेंगे और इसके एक सप्ताह बाद 23 अक्टूबर को विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों के लिए मतदान होगा। दोनों चुनावों का मतदाता वर्ग अलग है। राज्यसभा में विधायकों का संख्याबल और दलगत अनुशासन कसौटी पर होगा, जबकि विधान परिषद चुनाव में पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता फैसला करेंगे। नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे।

विधान परिषद चुनाव की यह अलग मतदाता सूची इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से भी जोड़ रही है। भाजपा और समाजवादी पार्टी ने 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने के साथ-साथ कॉलेज और विश्वविद्यालयों के युवा वर्ग तक पहुंच बनाने के अभियान भी तेज किए हैं। खास तौर पर जेन-जी को लेकर दोनों दलों की सक्रियता बढ़ी हैं। हालांकि विधान परिषद की स्नातक सीटों के मतदाता सीधे तौर पर जेन-जी नहीं हैं। यहां पात्रता डिग्री और निर्धारित अवधि की शर्तों का पेंच है। इसलिए इस चुनाव में जेन-जी का सीधा वोट बैंक नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक राजनीतिक पहुंच बनाने का समानांतर अभियान महत्वपूर्ण है।

भाजपा ने सभी 11 सीटों पर खोले पत्ते

भाजपा ने सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने पांच सीटों पर मौजूदा सदस्यों को फिर मौका दिया है और छह सीटों पर नए या अन्य सामाजिक-संगठनात्मक आधार वाले चेहरों को उतारा है।
स्नातक सीटों पर लखनऊ-सीतापुर से अवनीश कुमार सिंह, वाराणसी से केदारनाथ सिंह, आगरा से मानवेंद्र प्रताप सिंह, मेरठ-सहारनपुर से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी से अशोक कुमार राठौर प्रत्याशी हैं।
शिक्षक सीटों पर लखनऊ से उमेश द्विवेदी, वाराणसी से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा से हरिकिशोर तिवारी, मेरठ से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद से हरिसिंह ढिल्लों और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी मैदान में हैं।
भाजपा की सूची में मौजूदा सदस्यों को दोहराने के साथ ऐसे चेहरों को भी जगह मिली है जिनका संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पहले से राजनीतिक या पेशेवर नेटवर्क है। चुनाव से पहले पार्टी स्तर पर इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ जोड़कर संगठनात्मक गतिविधियां भी बढ़ाई गई हैं।

सपा ने दो सीटों पर अंतिम समय में बदले चेहरे

सपा ने सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के बाद आगरा शिक्षक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर अपने उम्मीदवार बदल दिए। आगरा में प्रकाश चंद्र गुप्ता की जगह डॉ. आकाश अग्रवाल और गोरखपुर-फैजाबाद में कमलेश यादव की जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया है।

आकाश अग्रवाल पहले निर्दलीय एमएलसी रह चुके हैं। संजयन त्रिपाठी भाजपा से टिकट के दावेदार थे। भाजपा ने गोरखपुर-फैजाबाद से मौजूदा एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद संजयन त्रिपाठी सपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें उसी सीट से उम्मीदवार बना दिया।
इस बदलाव के साथ सपा ने दो सीटों पर पहले घोषित उम्मीदवारों के बजाय ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा है जिनका संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में अपना राजनीतिक संपर्क और चुनावी अनुभव है। इससे शिक्षक सीटों पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन के बाहर मौजूद नेटवर्क भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन गया है।

राज्यसभा से बिल्कुल अलग होगा एमएलसी का गणित

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के बीच समय का अंतर कम है लेकिन दोनों की चुनावी जमीन अलग है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के सदस्य मतदान करेंगे। विधान परिषद की इन 11 सीटों में संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता मतदान करेंगे।

इसलिए राज्यसभा में किसी दल की स्थिति या विधायकों के बीच बनने वाला समीकरण विधान परिषद चुनाव का सीधा गणित नहीं बनता। दोनों चुनाव अलग मतदाता समूहों की राजनीतिक पसंद दर्ज करेंगे। यही वजह है कि 16 अक्टूबर के राज्यसभा परिणाम के पांच दिन बाद होने वाला एमएलसी चुनाव अलग राजनीतिक संकेत देगा।

जातीय समीकरण के साथ पेशेवर पहचान पर भी जोर

भाजपा और सपा दोनों दलों के प्रत्याशी चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का पहलू है। भाजपा की सूची में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कुर्मी सहित अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के चेहरे हैं। सपा की सूची में यादव और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ मुस्लिम समाज से जुड़े चेहरे भी हैं। सपा अपने व्यापक राजनीतिक अभियान में पीडीए अर्थात पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को लगातार प्रमुखता दे रही है।

हालांकि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जातीय समीकरण के साथ पेशेवर पहचान भी चुनावी संपर्क का आधार है। शिक्षक संगठन, विश्वविद्यालयों से जुड़े नेटवर्क, स्नातक मतदाता, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, फीस, छात्रवृत्ति और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे इन निर्वाचन क्षेत्रों की राजनीति में जगह बनाते हैं।
यही कारण है कि इन 11 सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह पूरे सामाजिक समीकरण का प्रतिबिंब नहीं है।

अब असली नया एंगल : जेन-जी तक पहुंच

विधान परिषद चुनाव की पांच स्नातक सीटें राजनीतिक दलों को उस शिक्षित वर्ग तक पहुंचने का अवसर देंगी, जिसके आसपास विश्वविद्यालय, कॉलेज और युवा संगठन का नेटवर्क मौजूद है। इसी नेटवर्क के समानांतर भाजपा और सपा ने जेन-जी के बीच अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश तेज की है।

भाजपा : युवा मतदाताओं पर फोकस

भाजपा ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में युवा टीम बनाने और स्कूल-कॉलेजों में युवाओं से सीधे संवाद की योजना बनाई है। पार्टी के प्रस्तावित अभियान में युवाओं की समस्याएं, अपेक्षाएं और सरकार के बारे में उनकी राय जानने के साथ उन्हें संगठन से जोड़ने की कोशिश चल रही है।
भाजपा की युवा इकाई की ओर से विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर संवाद अभियान की तैयारी भी की गई है। पार्टी का फोकस युवा मतदाताओं तक सरकार की योजनाओं और अपने राजनीतिक संदेश को पहुंचाने पर है।

सपा : युवाओं को बूथ स्तर तक जोड़ने का लक्ष्य

सपा ने छात्र सभा के जरिए ‘यूथ जोड़ो, बूथ मजबूत करो’ अभियान शुरू किया है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सदस्यता, युवा एजेंट बनाने, संवाद और युवाओं से सुझाव लेने की प्रक्रिया इस अभियान का हिस्सा है। पार्टी युवा केंद्रित घोषणापत्र के लिए भी फीडबैक जुटा रही है।
सपा के कैंपस अभियान में रोजगार, पेपर लीक, फीस और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों को युवाओं के बीच उठाया जा रहा है। पार्टी ने छात्र संगठनों के जरिए युवाओं को बूथ स्तर के संगठन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है।

एमएलसी चुनाव से जुड़ती आगामी विस चुनाव की राजनीतिक कड़ी

विधान परिषद की स्नातक सीटों पर जो मतदाता पंजीकृत हैं, उनमें एक हिस्सा युवा और हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा पूरी करने वाला वर्ग है। वहीं कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में मौजूद बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो आगामी विधानसभा चुनावों में पहली बार या हाल के वर्षों में मतदान की पात्रता हासिल कर चुके हैं।

इसलिए भाजपा का जेन-जी चौपाल और कॉलेज संवाद तथा सपा का कैंपस सदस्यता और युवा एजेंट अभियान एमएलसी चुनाव से आगे आगामी विस चुनाव के लिए संगठन तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों दलों का फोकस अलग-अलग संदेश और संगठनात्मक तरीकों के साथ उसी युवा वर्ग तक पहुंच बनाने पर है।

शिक्षक सीटों पर अलग राजनीतिक संदेश

छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक संगठनों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दे भी चुनावी संवाद का हिस्सा हैं। सपा की ओर से पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे में रखा गया है। इससे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी राजनीति का एक अलग एंगल बना है। एक ओर उम्मीदवारों के संगठनात्मक संपर्क और शिक्षक समुदाय में पकड़ है, दूसरी ओर दल अपने व्यापक राजनीतिक मुद्दों को इस विशिष्ट मतदाता समूह तक पहुंचा रहे हैं।

11 सीटें लेकिन दो स्तर पर चुनावी तैयारी

भाजपा और सपा दोनों के लिए यह चुनाव दो स्तरों पर चल रहा है। एक स्तर पर 11 सीटों का तत्काल चुनाव है। दूसरे स्तर पर शिक्षक, स्नातक, विश्वविद्यालय और कॉलेज के नेटवर्क के जरिए आगामी विस चुनाव के लिए संगठनात्मक संपर्क मजबूत करने की प्रक्रिया है।

भाजपा के पास मौजूदा सदस्यों को दोहराने और नए चेहरों के जरिए निर्वाचन क्षेत्रों में अपना आधार बनाए रखने की चुनौती है। सपा ने तीन मौजूदा सदस्यों को दोहराने के साथ दो सीटों पर अंतिम समय में उम्मीदवार बदले हैं। दूसरी ओर दोनों दलों ने युवा संपर्क के लिए अलग-अलग अभियान शुरू किए हैं।

Updated on:
03 Oct 2026 06:05 pm
Published on:
03 Oct 2026 06:02 pm