ज्योतिष और आयुर्वेद दोनों में तांबा (Copper) को औषधीय धातु माना गया है। तांबे का सीधा असर शरीर, मन और ग्रहों पर पड़ता है। यह मंगल और सूर्य को मजबूत करता है, पाचन तंत्र सुधारता है और शरीर को विषमुक्त करता है। सही तरीके से तांबे का उपयोग जीवन में स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ा सकता है।
तांबा हमारे जीवन की प्रमुख धातुओं में से एक है। यह विद्युत का सुचालक है और अग्नि तत्व से भरपूर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में तांबे का संबंध मुख्य रूप से मंगल ग्रह से होता है, जबकि यह सूर्य को भी मजबूत करता है।
आयुर्वेद के अनुसार तांबा शरीर के पित्त और वात दोष को संतुलित करता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से पूजा-पाठ में तांबे के पात्रों का प्रयोग किया जाता रहा है।
तांबे का नियमित और सही प्रयोग शरीर को शुद्ध करता है। यह खून को साफ करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। तांबा पेट की गड़बड़ियों, गैस और त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से तांबा मंगल को बल देता है, जिससे साहस, आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होती है। वहीं सूर्य मजबूत होने से नेतृत्व क्षमता और उत्साह बढ़ता है।
तांबे का छल्ला (Copper Ring Remedy)
रविवार या मंगलवार को अनामिका उंगली में तांबे का छल्ला धारण करें। इससे आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और साहस में सुधार होता है।
लाल धागे में तांबा पहनना
तांबे का टुकड़ा या छल्ला लाल धागे में कमर पर पहनने से नाभि और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
तांबे का सिक्का (Copper Coin Remedy)
छेद वाला तांबे का सिक्का लाल धागे में गले में पहनने से दुर्घटनाओं और चोट से बचाव होता है।
रात में तांबे के बर्तन में पानी रखें और सुबह घूंट-घूंट करके पिएं। इससे शरीर विषमुक्त होता है, त्वचा निखरती है और पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।