वाराणसी

अखिलेश यादव की बढ़ती जा रही ताकत, साध रहे यह समीकरण

बीजेपी की बढ़ जायेगी मुश्किल, सपा की नयी रणनीति आ रही काम
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Jan 21, 2020
Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav

वाराणसी. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ताकत लगातार बढ़ती जा रही है, जिन समीकरणों को साधने में फेल होने पर सपा को चुनाव में नुकसान होता था उन्हीं समीकरणों को साधने में अखिलेश यादव जुट गये हैं। पार्टी की बदली रणनीति बड़ी काम आ रही है। यूपी चुनाव 2022 के पहले समाजवादी पार्टी की बढ़ती ताकत बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
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सपा पूरी तरह से यूपी चुनाव 2022 की तैयारी में जुट चुकी है। सीएए का विरोध हो या यूपी का अन्य मुद्दा। समाजवादी पार्टी ने सीएम योगी आदित्यनाथ का विरोध कर खुद को मुख्य विपक्षी पार्टी बनाया हुआ है। मायावती की पार्टी बसपा से सपा का गठबंधन टूटने के बाद अखिलेश ने अकेले ही चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। सपा की सक्रियता का असर हुआ है कि बीजेपी से लेकर बसपा व अन्य दल के नेता तेजी से सपा में शामिल हो रहे हैं। कभी यह स्थिति बीजेपी की होती थी। यूपी चुनाव २०१७ से पहले बीजेपी में अन्य दलों के नेताओं के शामिल होने की होड़ मची थी। सपा पर हमेशा ही एक जाति की राजनीति करने का आरोप लगता है। लेकिन सपा ने अब रणनीति बदल दी है। बसपा के कभी कद्दावर नेता माने जाने वाले रामप्रसाद चौधरी, पूर्व विधायक दूध नाम, जितेन्द्र कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मालती देवी, विपिन शर्मा, उमेश पांडे आदि नेता सपा में शामिल हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य नेता भी है जिन्हें अखिलेश यादव ने खुद सपा की सदस्यता दिलायी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के खास माने जाने वाले व हिन्दू युवा वाहिनी (भारत) के अध्यक्ष सुनील सिंह, बसपा सरकार के पूर्व मंत्री डा.रघुनाथ प्रसाद भी सपा में शामिल हो गये हैं। बड़ी बात है कि सपा के विरोधी दल में यह भगदड़ क्यों मची है। इसका साफ संदेश है कि सपा मजबूत हो रही है और नेता सुरक्षित सहारा खोज रहे हैं।
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सपा साध रही जातीय समीकरण, बीजेपी की बढ़ जायेगी मुश्किल
पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर व अमित शाह की रणनीति के चलते ही बीजेपी ने यूपी विधानसभा में रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। बीजेपी की इस जीत में जातीय समीकरण बहुत काम आया था। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से लेकर अन्य नेताओ को आगे करके बीजेपी ने सपा व बसपा के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की थी। सपा भी इसी राह पर चल रही है। सभी जाति के नेता को पार्टी में शामिल करके अपने पुराने वोट बैंक को फिर से पाने का प्रयास कर रही है। यूपी की राजनीति की जो स्थिति है उसमे एक तरफ बीजेपी होगी। जबकि दूसरी तरफ सपा, बसपा के साथ राहुल गांधी व प्रियंका गांध की कांग्रेस होगी। उसी दल की स्थिति मजबूत रहने वाली है जो सभी समीकरण को साधने में सफल रहेगी।
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Published on:
21 Jan 2020 07:47 pm