वाराणसी

काशी का ऐसा मंदिर जहां भोलेनाथ भी होते हैं नतमस्तक, साल में केवल 5 दिन होता है दर्शन, भक्त पाते हैं खजाना

Varanasi News: धर्म और आस्था की नगरी वाराणसी में एक ऐसा भी मंदिर है, जहां स्वयं भगवान भोलेनाथ माता अन्नपूर्णा के सामने नतमस्तक नजर आते हैं। काशी में स्थित यह मंदिर धनतेरस के दिन खुलता है और 5 दिन तक भक्तों को मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होते हैं।
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Updated: 6 Nov 2026, 7:57 AM IST
Annapurna Temple Varanasi
मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा, (Pc-Annapurna Trust Fb)

Annapurna Temple in Varanasi: धर्म और आस्था की नगरी वाराणसी में एक ऐसा भी मंदिर है, जहां स्वयं भगवान भोलेनाथ माता अन्नपूर्णा के सामने नतमस्तक नजर आते हैं। काशी में स्थित यह मंदिर धनतेरस के दिन खुलता है और 5 दिन तक भक्तों को मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर दराज से पहुंचते हैं। आलम यह रहता है कि श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए खड़े रहते हैं। आज (शुक्रवार) सुबह 5 बजे से मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन शुरू हो चुके हैं और भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है।

सुबह 5 बजे से शुरू हुआ दर्शन

कहा जाता है कि काशी में कोई भूखा नहीं सोता है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मां अन्नपूर्णा खुद से उठती हैं। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने माता अन्नपूर्णा से यह वचन मांगा था कि काशी आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे और मां अन्नपूर्णा ने भगवान भोलेनाथ को वचन दिया था कि वह यहां पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पेट भरने का काम करेंगी। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। शुक्रवार को धनतेरस है और मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए सुबह 4 बजे से विशेष पूजा अर्चना की गई। इसके साथ ही मां अन्नपूर्णा का श्रृंगार भी किया गया है। आरती संपन्न होने के बाद सुबह 5 बजे से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। हालांकि, इस बार निर्धारित समय से एक घंटे पूर्व से ही दर्शन शुरू हो चुका है।

अभिजीत मुहूर्त में विशेष पूजन के बाद दर्शन शुरू हुआ। इस दौरान श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के दर्शन के बाद वहां मिलने वाले खजाना और लावा का प्रसाद पाने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े हुए हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अलग रास्ते का इंतजाम किया हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई है और सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मेडिकल टीम भी तैनात की गई है। बांस फटाक से गेट नंबर एक स्थित ढूंढी राज मार्ग से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं और प्रशासन द्वारा अस्थाई रूप से बनाई गई सीढ़ियों से होते हुए मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन कर रहे हैं। इसके बाद कालिका गली से निकासी की व्यवस्था की गई है।

क्या है मान्यता

मान्यता है कि मां के खजाने से प्राप्त धन, पुष्प को अपने घर के पूजा घर या अपने खजाने में रखा जाये तो उस परिवार में धन, धान्य और यश की वृद्धि होती है। मां के दर्शन के लिए पुरे भारतवर्ष से लोग आते हैं, लेकिन धनतेरस के दिन मां के दर्शन का विशेषमहात्म है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद धनवंतरी भी आज के ही दिन अपने हाथों में अमृत कलश लिए पृथ्वी पर आए थे। इस दिन धनवंतरी जयंती भी मनाई जाती। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर इस अलौकिक नजारे को देखने और उसका एक हिस्सा बनने के लिए लोग दूर-दूर से मां के दरबार में पहुचते हैं।

Updated on:
6 Nov 2026, 7:57 AM IST
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