Kashi Vishwanath-Gyanvapi case: 15 मामले एक साथ सुने जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है। आइये बताते हैं क्या है पूरा मामला।
Kashi Vishwanath-Gyanvapi case: ज्ञानवापी परिसर मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हिन्दू पक्ष की मांग थी कि ज्ञानवापी से जुड़े 15 मामले इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक साथ सुने जाएं जिसपर आपत्ति जताते हुए मुस्लिम पक्ष ने इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है।
वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि आज, सील किए गए क्षेत्र की एएसआई जांच की मांग करते हुए मामले को बहुत ही सीमित आईए में अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। 16 मई, 2022 को, हमने दावा किया कि तथाकथित 'शिवलिंग' पाया गया था। वज़ू टैंक क्षेत्र में। अंजुमन इंतेज़ामिया इसका खंडन करता है और कहता है कि यह एक फव्वारा है। हमने इस क्षेत्र की एएसआई जांच के लिए कहा था और हमने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आईए (अंतरिम आवेदन) दायर किया था जिसे आज सूचीबद्ध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है और कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
हिन्दू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने बताया कि मामला शुरुआत में हाई कोर्ट से सुनवाई के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वजूखाने में मिला शिवलिंग सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुरक्षित है। हालांकी, अभी तक शिवलिंग का पुरातात्विक सर्वेक्षण नहीं किया गया है और यह तय नहीं किया गया है कि यह एक शिवलिंग है या एक फव्वारा।
मदन मोहन यादव ने आगे कहा कि जैसा कि मुस्लिम पक्ष का दावा है, उनका तर्क है कि यह एक फव्वारा है। इसके अतिरिक्त, एएसआई सर्वेक्षण ज्ञानवापी मस्जिद में बारह में से आठ तहखानों को कवर करने में असमर्थ रहा और मुख्य गुंबद के नीचे के स्थान का सर्वेक्षण, जहां काशी विश्वनाथ का ज्योतिर्लिंग स्थित है अभी पूरा नहीं किया जा सका।
सुप्रीम कोर्ट मामले में अगली सुनवाई की अगली तारीख 17 दिसंबर दी है। बताया जाता है कि वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिला था जिसे मुस्लिम पक्ष ने फब्बारा बताया था। इसी सिलसिले में आज सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई हुई और मुस्लिम पक्ष को दो हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया गया है।