
Flood Situation in varanasi: वाराणसी में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। बाढ़ राहत शिविरों और बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। संवेदनशील और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक, राहत एवं बचाव तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस, पीएसी और आपदा मित्रों की मॉक ड्रिल भी कराई जा चुकी है, ताकि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की देरी न हो।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता ने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को पूरी तैयारी के साथ अलर्ट रखा गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में 'जीरो रिस्पांस टाइम' के उद्देश्य से सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे। बाढ़ प्रबंधन में पूर्व तैयारी, लगातार निगरानी, समयबद्ध सूचना और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सजगता के साथ कार्य करें और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।
डॉ. सदानंद गुप्ता ने मंगलवार को संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए बाढ़ राहत शिविरों, बाढ़ चौकियों और उपलब्ध अन्य संसाधनों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से चिन्हित राहत शिविर, वहां तक पहुंचने वाले मार्ग, आवश्यक संसाधन तथा राहत एवं बचाव से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी तरह ठीक और चालू हालत में रखी जाएं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को बिना किसी विलंब के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। साथ ही एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों के साथ प्रभावी समन्वय बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन के अनुसार, वाराणसी में कुल 46 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इनमें तहसील सदर में 37, राजातालाब में 6 और पिंडरा में 3 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन राहत शिविरों की अनुमानित क्षमता 7,392 लोगों की है। इसके अतिरिक्त तहसील सदर में 15 अस्थायी बाढ़ राहत शिविर भी तैयार किए गए हैं, जिनकी अनुमानित क्षमता 3,785 लोगों की है।
बाढ़ की निगरानी और राहत-बचाव कार्यों के लिए जिले में कुल 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इनमें सात वायरलेस बाढ़ चौकियां शामिल हैं। जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की भी पहचान की है। जिले में कुल 195 गांव और मोहल्ले बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किए गए हैं। इनमें सदर तहसील के 150, राजातालाब के 24 और पिंडरा तहसील के 21 गांव एवं मोहल्ले शामिल हैं।
बाढ़ की स्थिति में राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों का गठन कर दिया है। वहीं, पशुपालन विभाग ने भी पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सकों की टीम तैयार की है।पशुओं के चारा की भी व्यवस्था की गई है। बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण भी तैयार रखे गए हैं। जिले में संचालित नावों के लिए नाविकों को 33,300 लाइफ जैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ, पीएसी, जल पुलिस के साथ थल सेना और वायु सेना की सहायता उपलब्ध रहने की व्यवस्था की गई है। सभी चिन्हित बाढ़ राहत शिविरों की जियोटैगिंग पूरी की जा चुकी है। राहत शिविरों में नोडल अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है।
बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग से प्रत्येक दो घंटे पर जलस्तर की जानकारी प्राप्त की जा रही है। जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक बाढ़ कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 0542-2508550, 0542-2504170, 1077 तथा मोबाइल नंबर 9140037137 पर संपर्क कर सकते हैं।