
Vidisha news: पत्रिका के 'थाली में जहर' अभियान के तहत मसालों में मिलावट का बड़ा खेल सामने आ रहा है। जिले में पैकिंग मसालों के नाम पर मिलावट का खेल चल रहा है। इससे शुद्धता और चटक रंग दिखाकर लोगों की रसोई तक धीमा जहर पहुंचाया जा रहा है। मुनाफाखोरी की अंधी दौड़ में दिखाने के लिए जहां केमिकल रंगों लाल मिर्च और हल्दी को आकर्षक का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है, बाजार में बिकने वाले पैकेटबंद और खुले पिसे मसालों में रंगत लाने केमिकल का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है।
हकीकत यह है कि शुद्ध खड़ी लाल मिर्च को पीसने पर वह कभी सूर्ख लाल रंग नहीं देती, लेकिन ग्राहकों को आकर्षित करने इसे केमिकल से रंगा जा रहा है। यही हल्दी का है। बाजार की मिलावटी हल्दी का एक छोटा चम्मच पूरी सब्जी को गहरा पीला कर देता है, जबकि असली गांठ वाली हल्दी पीसने पर ऐसा कृत्रिम पीलापन कभी नहीं आता।
इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाला सच धनिया पाउडर का सामने आया है। किसानों से धनिया का वह भूसा कौड़ियों के दाम खरीदा जा रहा है, जिसे मवेशी भी नहीं खाते। वजन और मात्रा बढ़ाने इसी भूसे को धनिया के साथ पीसकर खपाया जा रहा है। इसका गणित भी सीधा है, शुद्ध धनिया के दानों को पीसकर पाउडर बनाना दानों की कीमत से ज्यादा महंगा पड़ता है। इसके बावजूद बाजार में पिसा हुआ धनिया और खड़े दाने लगभग एक ही रेट पर बिक रहे हैं, जो सीधे तौर पर इस मिलावट की गवाही देता है।
आप जब भी बाजार से धनिया खरीद कर घर लेकर आए तो चेक जरूर करें तो इन तरीकों से करें चेक…