
Income Tax Return: आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की समय-सीमा में केवल चंद रोज बचे है। समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया तो पांच हजार रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। बकाया टैक्स पर ब्याज लगेगा सो अलग। इस तरह समय पर पूरी तैयारी के साथ रिटर्न दाखिल करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार बिना पूरी तैयारी के पोर्टल पर रिटर्न भरना परेशानी का कारण बन सकता है।
गलत जानकारी देना या किसी आय को छिपाना आयकर विभाग के नोटिस का कारण बन सकता है। इसलिए आईटीआर भरने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म-26 एएसए एआईएस (वार्षिक सूचना विवरण) व टीआईएस (टैक्सपेयर सूचना सारांश) सहित बैंक ब्याज, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, किराया आय और पूंजीगत लाभ से संबंधित सभी दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है। अगर आपने अभी तक तैयार नहीं किया है तो तुरंत कर लें।
-31 जुलाई, नौकरीपेशा, पेंशनभोगी और ऐसे व्यक्तिगत करदाता जिनका ऑडिट आवश्यक नहीं है।
-31 अगस्त, ऐसे व्यवसायी और प्रोफेशनल्स, जिन पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं होता।
-31 अक्टूबर, टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले व्यवसाय व फर्म।
-30 नवंबर, ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विशेष मामलों के करदाता।
पुरानी कर व्यवस्था
सामान्य व्यक्ति - 2.50 लाख रुपए
वरिष्ठ नागरिक 3.0 लाख रुपए
अतिवरिष्ठ नागरिक 5.0 लाख रुपए
नई कर व्यवस्था
सामान्य व्यक्ति 4.0 लाख रुपए
वरिष्ठ नागरिक 5.0 लाख रुपए
अतिवरिष्ठ नागरिक - 10 लाख रुपए
ई-वेरिफिकेशन
रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया गया है। ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया तो आयकर विभाग उसे मान्य नहीं करेगा। ऐसे में करदाताओं को रिटर्न भरने के तुरंत बाद आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या अन्य उपलब्ध माध्यम से उसका सत्यापन भी करना अनिवार्य है।
शहर की चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रियंका पीतलिया के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के बाद आईटीआर दाखिल करने पर अधिकतम 5 हजार रुपए तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। जिन करदाताओं की कुल आय 5 लाख रुपए तक है। उनके लिए यह जुर्माना अधिकतम एक हजार होगा। यदि किसी करदाता पर टैक्स बकाया है तो नियत तिथि निकलने के बाद उस पर 1 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज भी देय होगा।