
फोटो में मसाला कारोबारी मनोज कुमार जैन (Photo Source - Patrika)
Success Story: उम्र के जिस पड़ाव में अधिकांश लोग कारोबार बढ़ाने के बजाय आराम की जिंदगी की ओर बढ़ते हैं, इस आयु में शहर के मनोज कुमार जैन ने जोखिम उठाकर अपने छोटे से मसाला कारोबार को नई ऊंचाई देने की ठानी। हुनर पहले से था, लेकिन संसाधन सीमित थे। छोटी मशीनों से मसाले तैयार होते थे और बाजार भी सीमित था। मनोज ने हौसले से उड़ान भरी। अब न केवल उनकी आमदनी चार हो गुना हो गई है। बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे है।
छोटे से कारोबार को बढ़ाकर दूसरों को भी रोजगार देने की योजना बनाने वाले मनोज बताते हैं कि उनके दो बेटे हैं और दोनों बाहर अच्छी जॉब में हैं। उन्हें उनके कारोबार से जो मिलता था, पर्याप्त था, लेकिन करीब एक वर्ष पहले उन्होंने सोचा कि क्यों न इस कारोबार को थोड़ा और बढ़ाया जाए। इससे आमदनी भी बढ़ेगी और सबसे बड़ी बात दूसरों को रोजगार भी मिलेगा। योजना के अनुरूप उन्होंने मसाला तैयार करने के साथ ही पैकिंग के लिए भी नई व आधुनिक मशीनें लगाई और अपने उत्पाद को ब्रांड के रूप में बाजार में उतार दिया। आज उनका कारोबार न केवल उनकी आमदनी का जरिया है, बल्कि चार युवाओं को रोजगार भी दे रहा है।
मसाला प्रसंस्करण इकाई कभी बेहद छोटे स्तर पर चलती थी। मनोज के पास मसाला बनाने का अनुभव था, लेकिन आधुनिक मशीनरी व पैकेजिंग के लिए पूंजी नहीं थी। उन्होंने उद्यानिकी विभाग की एक योजना की मदद ली और नई मशीनें लगाई। मसाला तैयार करने के साथ ही पैकिंग भी शुरू कर दी। पहले उनकी बचत जहां 8 से 10 हजार आठ महीने में दूसरे कर्मियों को रुपए प्रतिमाह थी। वहीं, महज वेतन देने और खर्च निकालने के बाद भी 35 से 40 हजार रुपए की बचत हो रही है।
मनोज कहते हैं कि लंबे समय तक उन्होंने मसाला का व्यवसाय किया, लेकिन छोटे कारोबार में ही सीमित रह गया। पिछले वर्ष कारोबार बढ़ाने की योजना बनाई। उन्होंने बताया कि 66 वर्ष की उम्र में उनका अनुभव काम आया। उन्हें सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि वह दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। मसाला तैयार करने से लेकर पैकिंग और मार्केटिंग तक में वह खुद शामिल होते हैं। साथ के कर्मचारी उनकी मदद के लिए हैं। उनका कहना है कि हौसला हो तो रास्ते बन ही जाते हैं।
Updated on:
14 Sept 2026 02:45 pm
Published on:
14 Sept 2026 02:45 pm
