
विदिशा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चाहत को नया जीवन दिया - image credit- vidisha patrika
Vidisha : विदिशा जिले में सांस की नली में बाहरी चीज फंसने से जिंदगी और मौत से जूझ रहे दो मासूम बच्चों को शासकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। नटेरन की 8 माह की चाहत की सांस नली में सुपारी का टुकड़ा और ग्यारसपुर के 2 साल के सत्यम लोधी की सांस नली में मूंगफली का दाना फंस गया था। दोनों बच्चों की सांसे रुकने लगीं। चाहत और सत्यम को गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां ईएनटी विशेषज्ञों ने एयरवे मैनेजमेंट और रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के जरिए सफल उपचार कर उनकी जान बचा ली।
मेडिकल कॉलेज के इएनटी विभाग के डॉक्टरों ने ये कमाल दिखाया। बेहद गंभीर अवस्था में भर्ती बच्चों का डॉ. शिव कुमार रघुवंशी, डॉ. आदित्य गार्गव, डॉ. प्रियंका वर्मा, डॉ. शोभित यादव ने ऑपरेशन किया।
पहला मामला नटेरन तहसील के ग्राम सिरसी का है। कन्हैयालाल की 8 माह की बेटी चाहत ने 21 अगस्त को खेलते समय सुपारी का दाना निगल लिया। मां द्वारा दूध पिलाते समय उसे तेज ठसका लगा। घबराए परिजन उसे पहले नटेरन और फिर जिला अस्पताल ले गए, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में रेफर किया गया। बच्ची को शुरुआत में हाई फ़्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) पर रखा गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
एयरवे में गंभीर रुकावट की आशंका पर डॉक्टरों ने लैरिंगोस्कोपी की तो सांस की नली में सुपारी का टुकड़ा फंसा दिखा। इसके बाद ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने रिजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक से सुपारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उपचार के बाद बच्ची पूरी तरह अलर्ट, एक्टिव और सामान्य रूप से भोजन लेने लगी।
दूसरा मामला ग्यारसपुर तहसील के ग्राम सेमरा का है। 23 अगस्त को 2 साल के सत्यम लोधी को मूंगफली खाने के बाद सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे पहले पुअरिया के निजी क्लिनिक ले गए, जहां नेब्युलाइजेशन से आराम नहीं मिला। शाम को बच्चे को जिला अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान पाया गया कि बच्चे के फेफड़े की दाईं ओर हवा का प्रवेश (एयर एंट्री) पूरी तरह बंद था।
सत्यम को तुरंत मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में भेज कर ऑक्सीजन सपोर्ट, एंटीबायोटिक्स और नेब्युलाइजेशन पर रखा गया। 25 अगस्त को ईएनटी ऑपरेशन थिएटर में रिजिड ब्रोंकोस्कोपी से फंसी हुई मूंगफली निकाली गई। तीन दिन पीआईसीयू, एक दिन एचडीयू और दो दिन वार्ड में निगरानी के बाद सत्यम को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया।
Updated on:
01 Sept 2026 08:52 am
Published on:
01 Sept 2026 08:29 am
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