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विदिशा में 338 साल से हो रही गुप्त पूजा, आज सुबह 5 बजे खुले पट, उमड़ पड़े श्रद्धालु

Mangala Aarti At Radha Rani Mandir Vidisha : मुगलों से बचाकर वृंदावन से विदिशा लाई गईं थीं 'राधारानी', राधाष्टमी पर आज होगी पूजा, साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं पट
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विदिशा के नंदवाना के राधा रानी मंदिर में हुई मंगला आरती

विदिशा के नंदवाना के राधा रानी मंदिर में हुई मंगला आरती- image credit patrika enhanced AI Grok

Radha Rani Mandir Vidisha : एमपी के विदिशा के नंदवाना की संकरी कुंज गलियां शनिवार सुबह राधे राधे के स्वर से गूंज उठीं। यहां स्थित राधा रानी मंदिर राधावल्लभीय हवेली में वृंदावनलाल की जय का घोष गूंजा। मंदिर में मंगला आरती हुई। इसमें शामिल होने सुबह 5 बजे ही श्रद्धालु उमड़ पड़े। करीब 15 मिनट की पूजा अर्चना आरती के बाद कपाट बंद कर दिए गए। अब 12 बजे से मंदिर के पट खोलकर आम श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे। विदिशा के इस मंदिर में राधाष्टमी पर ही कपाट खोले जाते हैं। शेष दिनों में गुप्त पूजा सेवा की जाती है। राधा रानी मंदिर में 338 साल से यह परंपरा निभाई जा रही है। दर्शन के लिए दूर दूर से आए भक्त मंदिर के दरवाजे खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

राधा रानी मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि करीब 338 साल पुरानी उस लोकगाथा को अपने भीतर समेटे हुए है। लोकगाथा है कि मुगल आक्रमण के दौर में राधाजी की निधियों को बचाने के लिए भक्तों ने उन्हें वृंदावन से विदिशा तक सुरक्षित पहुंचाया था। कहते हैं कि आक्रमणकारियों से बचाने के लिए, राधाजी की मूर्ति सहित अन्य निधियों (सप्त सखी मंडल) को लेकर स्वामी परिवार के सदस्य वृंदावन से विदिशा पहुंचे थे।

पुजारी मनमोहन शर्मा के अनुसार करीब 338 वर्ष पहले स्वामी परिवार के सदस्य राधाजी की निधियों को लेकर विदिशा आए। उस समय उन्होंने विदिशा किले के बाहर निर्जन स्थान पर एक झोपड़ी बनाकर इन निधियों को स्थापित किया। मुगल आक्रमण के भय के कारण यहां सार्वजनिक रूप से पूजा-अर्चना तक नहीं की जाती थी। वर्ष में केवल एक दिन राधा अष्टमी पर आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के पट खोले जाते थे, जबकि शेष वर्ष परिवार की ओर से गुप्त रूप से पूजा की जाती थी। समय बदला, हालात बदले, लेकिन सालों पुरानी यह परंपरा आज भी कायम है।

मंदिर में विराजित राधारानी की निधियों को उसी परंपरा और श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। यही वजह है कि नंदवाना की गलियां साल में एक बार राधा अष्टमी पर आस्था के सैलाब की साक्षी बनती हैं। विदिशा ही नहीं, प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां राधारानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

एक साल बाद आज फिर खुले पट…

राधा अष्टमी के अवसर पर 19 सितंबर को दोपहर 12 बजे मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसके साथ ही राधारानी के दर्शन का सिलसिला शुरू होगा, जो पूरी रात चलेगा। मंदिर और नंदवाना की ओर आने वाले मार्गों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की भीड़ और राधारानी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आएगा।

सुबह 5 बजे हुई मंगला आरती

विदिशा के इतिहासकार, लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार गोविंद सक्सेना ने बताया कि मंगला आरती के लिए सुबह 5 बजे मंदिर के पट खोले गए। सालभर से इसका इंतजार कर रहे राधा रानी के भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच गए। अब दोपहर को आम भक्तों के दर्शन के लिए पट खोले जाएंगे।

पुजारी मनमोहन शर्मा के अनुसार शनिवार को दोपहर 12 से 2 बजे तक तिलक दर्शन व महोत्सव आरती दर्शन होंगे। दोपहर 2 बजे महिला मंडल की ओर से बधाई गायन होगा। शाम साढ़े 4 बजे दर्शन, शाम 5 बजे भोग दर्शन व मटकी छेदन, शाम 6 बजे संध्या आरती दर्शन होंगे। रात 7 बजे पालना दर्शन और हवेली संगीत में बधाई का आयोजन होगा। इसके बाद पूरी रात जागरण और दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा।

रात 11 बजे तक होंगे कार्यक्रम

अगले दिन 20 सितंबर सुबह 5 बजे मंगला आरती दर्शन होंगे। शाम साढ़े 5 बजे दर्शन और रात 11 बजे शयन आरती दर्शन के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट अगले राधा अष्टमी तक बंद कर दिए जाएंगे।