
Vidisha News :मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के जंगलों और वन्यजीवों को संरक्षण देने के लिए वन विभाग ने सेंच्युरी (वन्यजीव अभयारण्य) बनाने की दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। सिरोंज विधायक और कलेक्टर के निर्देश पर वन विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें लटेरी और सिरोंज के जंगलों के साथ शमशाबाद क्षेत्र के वन क्षेत्र को भी शामिल करने की योजना है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करने, अवैध शिकार और जंगलों में होने वाली अनधिकृत गतिविधियों पर अंकुश लगाने सख्ती बरती जाएगी।
सेंच्युरी बनने से जंगलों को केवल वन संपदा के रूप में नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के तौर पर संरक्षित करने का प्रयास शुरू होगा। इससे वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र, जलस्रोतों और जैव विविधता को बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही जंगलों में अतिक्रमण, अवैध कटाई और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा सकेगी।
अभयारण्य घोषित होने के बाद संबंधित क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। वन्यजीवों के शिकार, पकडऩे और उन्हें नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर कानूनी प्रतिबंध लागू होंगे। इसके अलावा वन क्षेत्र में खनन, निर्माण, पेड़ों की कटाई और अन्य गतिविधियां भी लागू वन्यजीव संरक्षण कानूनों और संबंधित स्वीकृतियों के अधीन नियंत्रित होंगी। इससे जंगलों के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने और वन्यजीवों के सुरक्षित विचरण में मदद मिलेगी।
सेंच्युरी विकसित होने से जैव विविधता संरक्षण के साथ प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। पर्यटन गतिविधियों का विकास पर्यावरणीय संवेदनशीलता और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जा सकेगा। पर्यटन गतिविधियों के विकास के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। योजना जिले में पर्यटन सर्किट तैयार करने की है। ताकि सांची का स्तूप देखने के लिए पहुंचने वाले पर्यटक विदिशा की ओर से भी रूख कर सकें।
विदिशा वन विभाग डीएफओ हेमंत यादव का कहना है कि, सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा के अलावा कलेक्टर की ओर से भी वन्यजीव अभयारण बनाने को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। प्रस्ताव तैयार करने के लिए एक टीम लगाई गई है। खुद भी उसमें लगा हूं। शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। आगे का निर्णय शासन स्तर से ही होगा।