इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन गुनगुने दूध में चीनी डालकर सुबह खाली पेट पिया जाए और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है साथ ही साथ शरीर को शक्ति मिलती है।
नई दिल्ली। सालमपंजा हिमालय और तिब्बत से 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसका आयात ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होता है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बल की वृद्धि के लिए किया जाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके नुस्खों का इस्तेमाल दीर्घकाल से होता आ रहा है। इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन गुनगुने दूध में चीनी डालकर सुबह खाली पेट पिया जाए और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है साथ ही साथ शरीर को शक्ति मिलती है। सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है। एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को लाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है इसका मूल्य लाखों का होता है।
ये भी है कारगर
हम आपको एक ऐसी जड़ी-बूटी की जानकारी दे रहे हैं। जिसे ताकत बढ़ाने के देसी नुस्खे से कम नहीं माना जाता। पुरुष इसका प्रयोग ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन रोचक बात तो यह है कि इस जड़ी बूटी की जानकारी भारत में शायद ही किसी को है। हिमालयी क्षेत्रों में तीन हजार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई के बर्फीले पहाड़ों में पाई जाने वाली इस जड़ी बूटी की चीन में भारी मांग है, जिसके चलते निर्वासित तिब्बती इसके बड़े कारोबार के साथ जुड़े हुए हैं। यार्सागुम्बा को Caterpillar Fungus के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कीट की तरह प्रतीत होता है इसकी लंबाई करीब दो इंच होती है। यह कीट एक प्रकार का कैटरपिलर है। बता दें कि, भारत में इस कीड़े के इस्तेमाल पर पाबंदी है लेकिन कई लोग इसे चोरी-छिपे उपयोग करते हैं। यार्सागुम्बा के स्वाद की बात करें तो यह स्वाद में मीठा होता है। यह ज्यादात्तर सर्दियों के मौसम में पाया जाता है।