पेरिड्स मिस होने पर अकसर लोग परेशान हो जाते हैं। और तरह तरह की गर्भ निरोधक गोलियां खाने लग जाते हैं।आज के इस आर्टिकल में हम इसी विषय पर जानकारी देंगे । आज हम आपको बताएंगे की ऐसे करना सेफ है या नही।
नई दिल्ली। बच्चों को जन्म देना और उन्हें पालना-पोसना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसीलिए बच्चे तभी पैदा करने चाहिए जब आप उनके लिए मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से तैयार हों। यही वजह है कि आदमियों और औरतों दोनों के लिए गर्भनिरोधक यूज करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। परंतु बात यदी गर्भ निरोधक गोली की है तो क्या है बार पेरिडस मिस होने पर इनका सेवन करना आपके लिए सही है ।
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भारत जैसे देश में जहां की आबादी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, गर्भनिरोधक गोलियों की जरूरत और भी बढ़ जाती है। कंडोम के बाद ये गोलियां दूसरी सबसे ज्यादा प्रयोग की जाने वाली गर्भरोधक हैं। हालांकि ये अनचाहे गर्भ को पूरी तरह से रोकने में तो कारगर हैं, लेकिन STDs से ये सुरक्षा नहीं दे पातीं।
साइड इफेक्ट
1.डिप्रेशन—प्रत्येक 100 महिलाएं जो गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नहीं करती हैं, उनमें हर साल 1.7 महिलाएं डिप्रेशन से पीड़ित हो जाती हैं।
2.मिचली आना
3. वजन बढ़ना
4.ब्रेस्ट में सूजन आना
5. दो पीरियड्स के बीच में खून के थक्के आना
6.मूड खराब रहना
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इन गोलियों को लेने का सही समय
किसी अन्य दवाई की ही तरह इन गोलियों को लेने से पहले भी अपनी डॉक्टर से इसके बारे में बात करना जरूरी है। जब भी आप गोलियां लेनी शुरू करें, हर रोज़ उन्हें एक निर्धारित समय पर ही लें। इसके लिए दिन में एक समय तय कर लें, चाहे सुबह नाश्ते के पहले या रात में सोते समय।
किसी भी तरीके की अन्य परेशानी होने पर एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें और अपना ध्यान रखें।
गर्भनिरोधक गोली खाने का तरीका बिल्कुल आसान है। आप जिस ब्रांड की दवा खा रही हों सबसे पहले उस दवा के दिशा निर्देशों को गंभीरता से पढ़ें और साथ ही साथ डॉक्टर की सलाह का गंभीरता से पालन करें। आमतौर पर गर्भनिरोधक गोली को रोजाना एक निर्धारित समय पर ही खाना चाहिए। आप इसके लिए दिन में कोई भी एक वक़्त निर्धारित कर सकती हैं।
गर्भनिरोधक गोलियां क्या है
गर्भ निरोधक गोलियां कई तरह से काम करती हैं जैसे कि हार्मोंस के लेवल को बनाए रखना, ओवुलेशन करने वाले एस्ट्रोजन को बढ़ने से कंट्रोल करना या सर्विकल म्यूकस को मोटा करना। इसके अलावा यह पिल्स पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन और ब्लीडिंग को भी कम करती हैं।