Russia-Ukraine War: रूस के खिलाफ युद्ध खत्म होने के बाद 26 देशों ने यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देने की बात कही है। इस पर रूस की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War), जो पिछले 42 महीने से ज़्यादा समय से चल रहा है, ने यूक्रेन में तबाही मचा दी है और इसकी वजह से जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। हालांकि यूक्रेन को लगातार मिले इंटरनेशनल सपोर्ट की वजह से यूक्रेनी सेना भी डटकर रूसी सेना का सामना कर रही है। इस वजह से कई रूसी सैनिक भी मारे जा चुके हैं। इस युद्ध की वजह से इंटरनेशनल लेवल पर कई देश, यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और मदद की पेशकश भी की है।
26 देशों ने यूक्रेन को युद्ध के बाद सुरक्षा की गारंटी दी है। इनमें मुख्य रूप से यूरोपीय देश हैं, जिन्होंने युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन की सुरक्षा के लिए अपनी सेना भेजने की पेशकश की है। इस पहल को 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' (Coalition Of The Willing) नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पेरिस में हाल ही में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में 26 देशों ने यूक्रेन को युद्ध सुरक्षा गारंटी देने का वचन दिया है।
इन 26 देशों ने यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह योजना भी बनाई है कि अगर भविष्य में रूस ने फिर से यूक्रेन पर हमला किया, तो उसका जवाब देने के लिए ये देश सैन्य और कूटनीतिक उपाय करेंगे। इस योजना के तहत इन देशों ने यूक्रेन में शांति स्थापना के बाद अपनी सेनाएं भेजने का ऑफर दिया है। इसके तहत न सिर्फ यूक्रेन की ज़मीनी सुरक्षा, बल्कि हवाई और समुद्री सुरक्षा भी की जाएगी।
रूस ने इस सुरक्षा गारंटी की योजना की कड़ी आलोचना की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे यूरोपीय महाद्वीप के लिए खतरे की स्थिति बताते हुए पूरी तरह इसे अस्वीकार्य बताया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने यूक्रेन के लिए वेस्टर्न देशों की तरफ से दी गई सुरक्षा गारंटी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि विदेशी, विशेष रूप से यूरोपीय और अमेरिकी सैनिक निश्चित रूप से यूक्रेन को सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे सकते। पेस्कोव ने चेतावनी भी दी है कि यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती को रूस की तरफ से उकसावे की कार्रवाई माना जाएगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।