अफगानिस्तान में तालिबान शासन में हालात काफी मुश्किल हो गए हैं। ज़िंदा रहने के लिए लोगों को कुछ ऐसा करने पड़ रहा है जो किसी भी माता-पिता के लिए काफी मुश्किल है।
तालिबान (Taliban) के शासन में अफगानिस्तान (Afghanistan) में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जब से तालिबान ने देश में सत्तापरिवर्तन किया है, तभी से अफगान लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई इंटरनेशनल मीडिया ने अफगानिस्तान में गहराते मानवीय संकट का ज़िक्र है, जहाँ काफी ज़्यादा गरीबी की वजह से कई परिवार भोजन, इलाज या कर्ज़ से राहत पाने के लिए अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर हो रहे हैं।
मीडिया रिपोट्स से पता चलता है कि ऐसी घटनाएं अब इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर देखने को मिलने रही हैं। अब तीन-चौथाई अफगान लोग अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे में उन्हें अपने बच्चों को बेचना पड़ रहा है। देश में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए घोर गरीबी एक आम बात बन गई है, न कि कोई अपवाद। और मीडिया रिपोर्टे के अनुसार अफगान लोगों को देश में हालात सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है।
अफगानिस्तान के बिगड़ते मानवीय संकट में कई परिवार अपनी आर्थिक ज़रूरतों के लिए अपने बच्चों को बेच रहे हैं। इनमें बेटियों को बेचने के ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अत्यधिक गरीबी, भूख, बेरोज़गारी और अंतर्राष्ट्रीय मदद में कटौती इसके पीछे मुख्य कारण हैं। तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर लगाई गई पाबंदियों ने इन मामलों को और भी बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 50 लाख लोग अफगानिस्तान में आपातकालीन स्तर की भूख का सामना कर रहे हैं, और कुपोषण तथा चरमराई हुई स्वास्थ्य सेवाओं के कारण बच्चों की मौतें बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आई है। कई लोगों को अपने परिवार के अन्य बच्चों को भूख से मरने से बचाने के लिए एक-दो बच्चों को बेचना पड़ रहा है।
अफगानिस्तान में वर्तमान हालात को देखते हुए बच्चों की खरीद-बिक्री करने वाले गिरोह पूरे देश में एक्टिव हैं। ये गिरोह मजबूर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। वहीँ ज़रूरतों की वजह से लोग इन गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं। अक्सर दलाल या रिश्तेदार भी इसमें बिचौलिए का काम करते हैं।