
Al Aqsa Flood Israel-Hamas War: 7 अक्टूबर 2023 की सुबह इजरायल पर हुए हमास के हमले ने दुनिया को हिला दिया था। इसके बाद शुरू हुआ गाजा-इजरायल युद्ध…जिसके अब तीन साल पूरे कर चुके हैं। लेकिन इस युद्ध में हजारों परिवार उजड़ गए। बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। भारी तबाही हुई। ऐसे में अब सवाल सिर्फ युद्ध का नहीं है। बल्कि सवाल यह है कि इस संघर्ष का अंत कब होगा और इजरायल आखिर क्या हासिल करना चाहता है? साथ ही सवाल ये भी है कि कैसे इस युद्ध में अमेरिका और यूरोपीय देश जो इजरायल के साथ खड़े हैं…उनका अब नजरिया बदल रहा है। इस देश के लोग अब फिलिस्तीन-गाजा के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया। कई रिपोर्ट में एक साथ 3 हजार से 5 हजार रॉकेट दागने की बात कही गई। इसे हमास ने ऑपरेशन ‘अल-अक्सा फ्लड’ नाम दिया। हमास के लड़ाकों ने गाजा की सीमा भी पार की। इजरायली इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जिसके कारण बड़ी संख्या में (1200 से अधिक) लोगों की मौत हुई। जबकि 250 से अधिक लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया।
ऐसे में इजरायल ने इसके जवाब में गाजा पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू किया। हवाई हमले किये। जमीनी कार्रवाई हुई। जिससे गाजा के बड़े हिस्से में भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें गाजा (फिलिस्तीन) में अब तक 74 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा यहां से लाखों लोग विस्थापित हुए। घर, अस्पताल, स्कूल और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई। जिसके बाद कई मानवाधिकार संगठन आगे आए। गाजा (फिलिस्तीन) के हक में आवाज बुलंद किए।
इस युद्ध का असर सिर्फ इजरायल और गाजा तक नहीं रहा। पूरे मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा। इजरायल के कार्रवाई से लेबनान और ईरान भी इसकी चपेट में आए।
गाजा युद्ध के लंबे खिंचने के साथ अमेरिका और यूरोप में इजरायल को लेकर नजरिया भी बदला है। ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ के 2026 सर्वे में 36 देशों के औसतन 67% लोगों ने इजरायल के बारे में आपत्ति जताई, कार्रवाई का विरोध किया। जबकि 25% लोगों ने इसे सही ठहराया। इसे टेरिरिज्म के खिलाफ कार्रवाई बताया। लेकिन जो अमेरिका सरकारी तौर पर इजरायल के साथ खड़ा रहा, अब वहां के लोगों का नजरिया बदल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 के प्यू सर्वे में 60% अमेरिकियों की इजरायल के प्रति राय नकारात्मक रही। जबकि पिछले साल (2025) में यह आंकड़ा 53% था। वहीं ‘गैलप’ के फरवरी 2026 सर्वे में पहली बार फिलिस्तीनियों के प्रति सहानुभूति 41% रही, जबकि इजरायलियों के लिए यह 36% थी।
यूरोप में भी कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने 2025 में ऐसा किया। हालांकि यूरोपीय संघ इजरायल पर आर्थिक दबाव को लेकर बंटा हुआ है। यानी आम लोगों की सोच बदली है, लेकिन सरकारों का रुख अभी पूरी तरह एक जैसा नहीं है। इसकी एक वजह ट्रेड भी हो सकता है। रिश्ते खराब होने की नौबत आ सकती है।
इजरायल का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करना और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही बंधकों की वापसी भी एक बड़ा मुद्दा रहा है। लेकिन लंबे युद्ध और गाजा में मानवीय संकट को लेकर इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। यूरोप और अमेरिका में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हुई है।
कई देशों ने गाजा में आम लोगों की स्थिति पर चिंता जताई है। इजरायल की सैन्य कार्रवाई और नागरिकों पर पड़ रहे असर को लेकर आलोचना बढ़ी है। वहीं, इजरायल के समर्थक अब भी उसके आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर देते हैं। तीन साल बाद भी यह संघर्ष आसान समाधान से दूर नजर आता है। एक तरफ इजरायल अपनी सुरक्षा चाहता है। दूसरी तरफ फिलिस्तीनी राज्य और अधिकारों का सवाल है। इसी बीच सबसे बड़ी चिंता आम लोगों की जिंदगी है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या युद्ध के बाद स्थायी शांति का कोई रास्ता निकल पाएगा।