
अमेरिका में मीडिया की आजादी पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संघीय संचार आयोग यानी एफसीसी ने गुरुवार को एक ऐसा फैसला लिया है जो पिछले लगभग 70 साल में पहली बार हुआ है। अब कोई भी एक कंपनी पूरे देश के एक तिहाई से ज्यादा घरों तक अपनी टीवी स्टेशन पहुंचा सकती है।
पहले यह सीमा सिर्फ 39 प्रतिशत की थी। वो सीमा अब हटा दी गई है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के दौरान आया है। हालांकि, इससे पहले ही कई बड़ी कंपनियां मीडिया पर मजबूत पकड़ जमाए बैठी हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, आज महज छह कंपनियां अमेरिकी मीडिया बाजार के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर काबिज हैं। कॉमकास्ट, डिज्नी, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी, पैरामाउंट स्काइडांस और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियां टीवी, फिल्म, स्ट्रीमिंग और समाचार तक का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।
पहले कोई कंपनी इतनी बड़ी नहीं बन सकती थी कि वह देश के ज्यादातर इलाकों में अपनी टीवी चैनल चला सके। अब केस-बाय-केस आधार पर अनुमति दी जाएगी। अब आलोचकों का कहना है कि इससे कुछ चुनिंदा कंपनियां और ताकतवर हो जाएंगी।
पहले नेक्सस्टार और टेग्ना के विलय को मंजूरी दी जा चुकी थी। उसमें एक कंपनी आधे से ज्यादा घरों तक पहुंच गई थी। अब नियम ही बदल दिए गए हैं तो और कंपनियां भी आगे बढ़ सकती हैं।
ट्रंप समर्थक इस फैसले को ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि आज के डिजिटल जमाने में स्थानीय टीवी स्टेशनों को बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से मुकाबला करने के लिए आकार बढ़ाने की जरूरत है। एफसीसी चेयर ब्रेंडन कार ने भी यही तर्क दिया कि पुरानी सीमा अब काम नहीं आती।
दूसरी तरफ विपक्षी इसको लेकर चेतावनी दे रही हैं। उनका मानना है कि मीडिया का इतना ज्यादा एक जगह जमा होना लोकतंत्र के लिए खतरा है। जब कुछ कंपनियां ही ज्यादातर खबरें और कार्यक्रम तय करेंगी तो अलग-अलग राय कम हो जाएंगी।
विपक्ष का तर्क है कि पहले भी मीडिया में एकाधिकार की शिकायतें चलती रही हैं। 1980 के दशक में 50 कंपनियां 90 प्रतिशत बाजार संभालती थीं। अब संख्या घटकर आधे दर्जन के करीब रह गई है।
अमेरिकी घरों में टीवी अभी भी बड़ी भूमिका निभाता है। स्थानीय स्टेशन मौसम, सड़क हादसों और इलाके की खबरें पहुंचाते हैं। अगर एक-दो कंपनियां ही पूरे देश में छा जाएं तो खबरों का रंग-ढंग एक जैसा हो सकता है।