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तमिल-ब्राह्मी से संस्कृत तक… वैली ऑफ किंग्स में मिला 2,000 साल पुराना भारतीय रहस्य

मिस्र की प्रसिद्ध वैली ऑफ किंग्स में मिले लगभग 30 तमिल-ब्राह्मी, संस्कृत और प्राकृत शिलालेखों ने 2,000 साल पुराने भारत-मिस्र व्यापारिक संबंधों पर नई रोशनी डाली है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये शिलालेख पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच भारतीय व्यापारियों की मौजूदगी का ठोस प्रमाण हैं।
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Feb 13, 2026
Ancient India-Egypt Trade
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मिस्र के प्रसिद्ध वैली ऑफ किंग्स में भारतीय भाषाओं के लगभग 30 शिलालेख मिले हैं, जिनमें मुख्य रूप से तमिलि (तमिल-ब्राह्मी) और प्राकृत शामिल हैं। यह खोज प्राचीन भारत और मिस्र के बीच लगभग 2,000 साल पुराने व्यापारिक संबंधों का प्रमाण देती है। छह रॉक-कट कब्रों में मिले इन शिलालेखों में 20 तमिलि और 10 संस्कृत व प्राकृत में हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों के लोग प्रथम से तृतीय शताब्दी ईस्वी के बीच, मिस्र में विशेष रूप से थीब्स की प्राचीन राजधानी में व्यापार के लिए जाते थे।

स्विट्जरलैंड स्थित स्लाविक एंड साउथ एशियन स्टडीज विभाग के प्रो. इंगो स्ट्राउच और पेरिस स्थित इएफइओ की प्रो. शार्लोट शिम्ड ने तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग के अंतरराष्ट्रीय तमिल शिलालेख सम्मेलन में इस खोज का खुलासा किया।

प्रो. शिम्ड ने कहा कि मिस्र में मिले 20 तमिलि शिलालेख भारत में अब तक मिले लगभग 100 तमिलि शिलालेखों में उल्लेखनीय वृद्धि है। इन शिलालेखों में सिकै कोर्रन नामक व्यापारी का उल्लेख आठ बार मिलता है। वहीं एक अन्य शिलालेख में संस्कृत में क्षहरता राजा के दूत का जिक्र है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये व्यापारी बहुभाषी थे और ग्रीक भी पढ़ते थे, क्योंकि उस समय व्यापारिक अनुबंध ग्रीक में लिखे जाते थे।

टीएनएसडीए के शैक्षिक सलाहकार प्रोफेसर के राजन ने बताया कि प्राचीन भारत का व्यापार नेटवर्क समुद्री मार्ग से पश्चिम की ओर ही था और यह खोज भारत तथा रोमन साम्राज्य के सांस्कृतिक व व्यापारिक संबंधों पर नई बहस शुरू करती है। थीब्स में मिले इन शिलालेखों से तमिल ब्राह्मी की भूमिका, व्यापारिक समुदायों की साक्षरता और प्राचीन भारत-मिस्र संबंधों के अध्ययन में नई दिशा मिलती है।

Updated on:
13 Feb 2026 07:21 am
Published on:
13 Feb 2026 07:21 am