
पाकिस्तान के हाथ से बलूचिस्तान निकलता जा रहा है। इसका ताजा संकेत भी सामने आया है। बालोचिस्तान प्रांत में इस हफ्ते अलगाववादी विद्रोहियों ने एक के बाद एक हमले कर सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को बताया कि 6 जुलाई से अब तक तीन अलग-अलग हमलों में 42 पुलिस और आर्मी के जवान अपनी जान गंवा बैठे।
वहीं, जवाबी कार्रवाई में 54 आतंकी मारे गए। यह घटना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, जहां बलूचिस्तान पहले से ही अलगाववादी हिंसा और अस्थिरता का गढ़ बना हुआ है।
पाकिस्तानी सेना के बयान के मुताबिक, इन हमलों में आतंकियों ने काफी तैयारी के साथ हमला किया। ज्यादातर हमले दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में हुए, जहां पहले भी सुरक्षा बलों पर कई बार हमले हो चुके हैं।
सेना ने कहा कि स्थिति को काबू में करने के लिए तुरंत एक्शन लिया गया और आतंकियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है। स्कूल-कॉलेज बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कई परिवार अपने घरों में ही कैद हैं।
बता दें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां विकास कम और समस्याएं ज्यादा हैं। लंबे समय से यहां अलगाववादी गुट सक्रिय हैं जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं।
बालोचिस्तान न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि यहां प्राकृतिक संसाधन भी भरपूर हैं। चीन का सीपीईसी प्रोजेक्ट भी इसी प्रांत से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां अस्थिरता न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि चीन के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है।
पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों को आतंकवादी गतिविधियां बताया है और कहा कि सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं। मारे गए जवानों में पुलिसकर्मी और सैनिक दोनों शामिल हैं। सेना ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारों को हर संभव मदद देने का वादा किया है।
यह घटना पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़ी करती है। पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कई बड़े हमले हो चुके हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।