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‘हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है’, बांग्लादेशी नेता हारुन इजहार ने दी खुलेआम धमकी, UNSC ने भी जताई चिंता

Harun Izhar: बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े नेता माने जाने वाला हारुन इजहार ने हिंदुओं को खुलेआम धमकी दी है। UNSC की रिपोर्ट में भी अल-कायदा (AQIS) के बढ़ते नेटवर्क पर चिंता जाहिर की गई है। जानें क्या है पूरा मामला...
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Aug 19, 2026
al qaeda in bangladesh, unsc report on aqis
बांग्लादेशी नेता हारुन इजहार ने दी खुलेआम धमकी / फोटो सोर्स- X(@Hindubd49346)

Harun Izhar Threat Hindus:बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच चटगांव में आयोजित एक रैली के दौरान चरमपंथी नेता हारुन इजहार ने हिंदुओं को खुलेआम धमकी दी है। इजहार का अल-कायदा से संबंध माना जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भाषण के वीडियो में इजहार यह कहते दिख रहा है कि 'हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है' और इसके लिए उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उसके लोग ही काफी हैं। इस भड़काऊ बयान के सामने आने के बाद बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं में डर और असुरक्षा का माहौल और बढ़ गया है।

'दावा मूवमेंट' के मंच से दिया भड़काऊ बयान

चटगांव में 'दावा मूवमेंट' नाम से आयोजित एक जनसभा में हारुन इजहार ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाते हुए यह विवादित बयान दिया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदू विरोधी ताकतों का प्रभाव तेजी से बढ़ता देखा गया है। मंदिरों में तोड़फोड़, संपत्तियों पर कब्जे और शारीरिक हमलों के बीच इस तरह के खुले धमकियों वाले वीडियो सामने आने से स्थिति और ज्यादा चिंताजनक हो गई है।

UNSC की रिपोर्ट में भी अल-कायदा का जिक्र

हारुन इजहार की इस धमकी से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक रिपोर्ट में भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट के अनुसार, आतंकी संगठन अल-कायदा बांग्लादेश को अपना नया ठिकाना बनाने की कोशिश में है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकी संगठन छोटे-छोटे सेल बनाकर पूरे क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करने में लगा है।

सत्ता परिवर्तन के बाद से क्यों बढ़ा कट्टरवाद?

बांग्लादेश में हिंसक जनविद्रोह के बाद जब शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा, तब से वहां कट्टरपंथी समूहों की भूमिका काफी मजबूत हुई है। जानकारों का मानना है कि वहां की प्रशासनिक व्यवस्था में आए ढीलेपन और सुरक्षा तंत्र के कमजोर पड़ने से अल-कायदा और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तत्वों को खुली हवा मिल गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को ड़रा दिया है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है।

Updated on:
19 Aug 2026 11:51 am
Published on:
19 Aug 2026 11:49 am