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बांग्लादेश में चुनाव आज, भारत की क्यों टिकी नजर?

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश रिश्तों की दिशा तय करने वाला अहम मोड़ हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने, अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और अंतरिम सरकार के दौर में यह चुनाव क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा संतुलन को सीधे प्रभावित करेंगे।

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Feb 12, 2026
तारिक रहमान के उभार से भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई अनिश्चितता आ सकती है।

Bangladesh Elections 2026: भारत की नजरें इस समय बांग्लादेश पर टिकी हैं, जहां 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव हो रहे हैं। यह चुनाव इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई थीं और यह पहला आम चुनाव है। दरअसल, इस चुनाव में करीब 13 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह सिर्फ बांग्लादेश का आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा मामला है।

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भारत के लिए क्यों अहम है बांग्लादेश की राजनीति?

बता दें कि शेख हसीना के शासन के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हुए हैं। 2015 का भूमि सीमा समझौता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, बिजली आपूर्ति और व्यापारिक रिश्तों में विस्तार इसकी मिसाल हैं। भारत ने बांग्लादेश को अरबों डॉलर की क्रेडिट लाइन दी और 500 मेगावाट बिजली का निर्यात किया।

लेकिन 2024 में छात्र आंदोलन ने तस्वीर बदल दी। कोटा प्रणाली के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन सरकार विरोधी जनआंदोलन बन गया। हिंसक कार्रवाई के बाद शेख हसीना भारत चली गईं और अब दिल्ली में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया है और प्रत्यर्पण की मांग की जा रही है।

अल्पसंख्यकों पर हमले और कूटनीतिक तनाव

शेख हसीना के जाने के बाद पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, पर हमलों की घटनाएं बढ़ीं। हजारों मामलों की रिपोर्ट सामने आई। भारत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया, जबकि बांग्लादेश ने भारत पर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। दोनों देशों के बीच वीजा सेवाएं भी अस्थायी रूप से निलंबित की गईं।

भारत के विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में बताया कि 5 अगस्त, 2024 से 23 मार्च, 2025 तक अल्पसंख्यकों से संबंधित 2,400 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने आगे कहा, "यह उम्मीद की जाती है कि बांग्लादेश इन घटनाओं की पूरी तरह से जांच करेगा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हत्याओं, आगजनी और हिंसा के सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाएगा, और इनमें से किसी भी हत्या या आगजनी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर उचित नहीं ठहराएगा।"

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