Chinmoy Krishna Das: बांग्लादेश हाई कोर्ट ने हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज कर दी। वह चटगांव हिंसा और सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या मामले में जेल में हैं।
Bangladesh High Court: बांग्लादेश हाई कोर्ट ने हिंदू संत और बाग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रवक्ता ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि चटगांव की निचली अदालत में उनके खिलााफ चल रहे मामले की सुनवाई जारी है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए फिलहाल उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। यह मामला सला 2024 में चटगांव में हुई हिंसा और एक सरकारी वकील की हत्या से जुड़ा है। इस फैसले के बाद चिन्मय कृष्ण दास को अभी जेल में ही रहना होगा।
चिन्मय कृष्ण दास पर जूनियर सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या से जुड़े मामले में आरोप तय किए गए हैं। सरकारी वकीलों की तरफ से अदालत में पेश जानकारी के अनुसार, इस मामले में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से 23 लोग हिरासत में हैं जबकि बाकी 16 अब भी फरार बताए जा रहे हैं। 19 जनवरी को चटगांव डिविजनल स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल ने चिन्मय कृष्ण दास समेत 39 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। इसके साथ ही ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य ने मीडिया से कहा, HC ने हमारी जमानत याचिका खारिज कर दी, क्योंकि चटगांव की निचली अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज चार अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की है। वकील ने अदालत से यह भी कहा कि चिन्मय कृष्ण दास लंबे समय से जेल में हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 को ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित अपमान करने का आरोप भी लगा था। इसके बाद चटगांव की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत के फैसले के बाद उनके समर्थकों ने ढाका और दूसरे शहरों में प्रदर्शन किए। चटगांव में यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की मौत हो गई थी।
पिछले साल 30 अप्रैल को हाई कोर्ट ने राजद्रोह मामले में चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी थी। लेकिन बाद में बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय पीठ ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और लगातार हिरासत में रखे जाने का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी चर्चा का विषय बना था। भारत ने पहले भी उनके हिरासत को लेकर चिंता जताई थी। साल 2024 में शेख हसीना सरकार हटने के बाद चिन्मय कृष्ण दास के संगठन ने कई रैलियां निकाली थीं। इन रैलियों में हिंदू समुदाय पर कथित हमलों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 8% है।