ढाका में हिंसा: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से महज कुछ दिन पहले अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को ढाका में नौवें राष्ट्रीय वेतनमान की मांग को लेकर हजारों सरकारी कर्मचारियों ने यूनुस के आधिकारिक आवास 'यमुना' का घेराव किया।
Bangladesh Protest Muhammad Yunus Residence: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बांग्लादेश में आम चुनाव के ऐलान के बाद भी गृहयुद्ध जैसे हालत बने हुए है। नौवें राष्ट्रीय वेतनमान को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक आवास जमुना के पास बड़ी संख्या में विरोध लोग प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों को हटाकर बैरिकेड लगाए गए है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने वाटर कैनन और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस के घर पर धावा बोल दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
नौवें राष्ट्रीय वेतनमान को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जा रहा है। भीड़ ने प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक आवास जमुना पर घेर लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षाबलों ने बैरिकेड्स का लगाया और वाटर कैनन, साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की।
शुक्रवार को प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड को तोड़कर मोहम्मद यूनुस के आवास की ओर बढ़ गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के दौरान 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए है।
ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर मसूद आलम का कहना है कि हम सतर्क हैं ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़े। उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे हैं ताकि वे कहीं और जाकर प्रदर्शन करें। ढाका के शहीद मीनार के पास सभी प्रदर्शनकारी जुटे और फिर मोहम्मद यूनुस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके आवास की ओर बढ़ रहे थे। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे छोड़े।
आपको बता दें कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। चुनाव से पहले हालात बिगड़ते जा रहे है। कर्मचारी अपनी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे है। प्रदर्शनकारियों को लग रहा है कि नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित वेतन वृद्धि की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। ऐसें में वे अपनी मांग को लेकर अंतरिम सरकार पर दबाव बनाकर नौवें राष्ट्रीय वेतनमान को तुरंत लागू करवाना चाहते है।