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ईरान पर बिना युद्ध जीत का दावा! ओबामा बोले- एक भी मिसाइल नहीं दागी, फिर भी झुका दिया तेहरान

Iran Nuclear Programme: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते को सफल कूटनीतिक कदम बताते हुए कहा कि यह बिना युद्ध और मिसाइल हमलों के हासिल किया गया था। ओबामा ने दावा किया कि इस डील से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी नियंत्रण लगा था।

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May 15, 2026
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Photo-IANS)

Obama on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल शांति वार्ता ठहरी हुई है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साल 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते का बचाव किया है। CBS से बातचीत करते हुए ओबामा ने कहा कि अमेरिका ने बिना किसी क्षेत्रीय संघर्ष को भड़काए और हजारों लोगों की जान लिए बिना, ईरान के 97 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकलवाने में सफलता हासिल की थी।

पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि हमने बिना एक भी मिसाइल दागे यह काम कर दिखाया। हमने उनके 97 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकलवा दिया। इसमें कोई विवाद नहीं है कि यह समझौता सफल रहा और इसके लिए हमें न तो बहुत सारे लोगों को मारना पड़ा और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा।

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इजरायली खुफिया एजेंसियों ने भी माना प्रभावी

उन्होंने यह भी कहा कि उस समय अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने भी इस समझौते को प्रभावी माना था। ओबामा ने कहा कि सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि इजरायली इंटेलिजेंस और हमारी एजेंसियों को भी लगता था कि यह समझौता सफल था।

ओबामा ने आगे कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं कि यह समझौता कामयाब रहा और इसके लिए हमें न तो बड़ी संख्या में लोगों की जान लेनी पड़ी और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा।

पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस समझौते ने मध्य-पूर्व में बड़े युद्ध को टालने में मदद की। उन्होंने कहा कि हमें लोगों को मारने या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने जैसी स्थिति पैदा नहीं करनी पड़ी।

क्या था 2015 का ईरान परमाणु समझौता?

साल 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन  के बीच JCPOA समझौता हुआ था। इसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना और बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना था।

समझौते के तहत ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार में करीब 98 फीसदी कटौती करने और परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, साल 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका इस समझौते से बाहर हो गया था। ट्रंप ने इसे एकतरफा और खराब समझौता बताया था।

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Published on:
15 May 2026 06:50 am
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