
Pakistan AI threat: बीजिंग (चीन) में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर इस हफ्ते जो चर्चा हुई, उसने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसमें पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधि पहुंचे।
इस कार्यक्रम में यह चर्चा हुई कि दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ तकनीक नहीं रह गई है। यह युद्ध के मैदान और फैसले लेने के तरीके को तेजी से बदल रही है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने एआई को आने वाले में दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने साफ कहा कि अगर इस पर काबू नहीं पाया गया तो वैश्विक सुरक्षा और ज्यादा खतरे में पड़ सकती है।
थाईलैंड के रक्षा मंत्री अदुल बूनथुमजारोएन ने कहा कि आज दुनिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। बड़ी शक्तियों के बीच मुकाबला बढ़ रहा है और कई इलाकों में संघर्ष जारी हैं। AI और नई तकनीकों के साथ युद्ध का रूप बदल रहा है।
थाईलैंड के रक्षा मंत्री ने आगे कहा- सबसे जरूरी सवाल यह नहीं कि कौन सबसे ताकतवर बनेगा, बल्कि यह है कि हम कैसे एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाएं जिसमें सबकी सुरक्षा हो।
बता दें कि इस तीन दिन के सम्मेलन में करीब दो हजार सैन्य अधिकारी, राजनयिक और विद्वान शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय देशों के रक्षा अधिकारी, उत्तर कोरिया का प्रतिनिधि, अमेरिका के पेंटागन का एक वरिष्ठ अधिकारी, रूसी विशेषज्ञ और तालिबान के प्रतिनिधि भी थे। बैठक गुरुवार को खत्म हो गई।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के उपाध्यक्ष जुर्ग लाउबर ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे हथियार अपने आप फैसला लेने वाले बन रहे हैं, बल प्रयोग पर इंसान का नियंत्रण बनाए रखना और भी जरूरी हो गया है।
उन्होंने AI के कुछ फायदों की भी बात की लेकिन सस्ते ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर खास जोर दिया। ये ड्रोन युद्ध के मैदान को बहुत फैला रहे हैं और मोर्चों की सीमाएं धुंधली कर रहे हैं।
पाकिस्तान के रक्षा सचिव मुहम्मद अली ने कहा कि नई तकनीकें रणनीतिक समयसीमा को बहुत छोटा कर रही हैं। AI फैसले लेने की रफ्तार बढ़ा देती है जबकि गलत सूचनाएं और अफवाहें लोगों का विश्वास तोड़ देती हैं।
इससे पहले कि सरकारें सही जवाब दे पाएं, स्थिति बिगड़ जाती है। वहीं, बांग्लादेश, मलेशिया और लाओस के प्रतिनिधियों ने भी AI के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने भी इसी काफी हद तक कंट्रोल करने की बात कही।