
एक तरफ स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए डील चल रही है। वहीं, दूसरी ओर इजराइल और ईरान के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच, इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा संदेश दिया है।
दरअसल, आज से ठीक पचास साल पहले 4 जुलाई 1976 को इजराइल के बहादुर सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन 'योनी' नेतन्याहू शहीद हो गए थे।
एंटेबे हवाई अड्डे पर इजराइली कमांडो की ऐतिहासिक ऑपरेशन में उन्होंने अपने भाइयों की जान बचाते हुए अपनी कुर्बानी दी थी।
आज उनकी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भावुक होकर उन्हें याद किया और देश की सुरक्षा को लेकर सख्त संकल्प को दोहराया।
समारोह में पहुंचे बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- पचास साल पहले मैंने अपने बड़े भाई, इजराइल के हीरो, लेफ्टिनेंट कर्नल योनी नेतन्याहू को खोया था। उनकी याद आज भी तरोताजा है।
समारोह में प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि इजराइल कभी भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो किसी भी कीमत पर इस खतरे को रोका जाएगा। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान समर्थित गुट सक्रिय हैं।
नेतन्याहू ने उत्तर इजराइल के निवासियों की सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा- हम दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा जोन में तब तक बने रहेंगे, जब तक हमारे उत्तरी इलाके के प्रिय निवासियों और पूरे देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तरी सीमा पर रहने वाले इजराइलियों की जान-माल की सुरक्षा सबसे ऊपर है। लेबनान की सीमा पर हिजबुल्लाह के हमलों के बाद इजराइल ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। पीएम ने साफ किया कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने समारोह के दौरान साफ कहा कि चाहे ईरान हो या लेबनान की सीमा, इजराइल अपनी सुरक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेगा।
समारोह में मौजूद सैन्य अधिकारी और परिवार के सदस्य भावुक नजर आए। इस मौके पर योनी की याद में कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
योनी नेतन्याहू की शहादत के पचास साल बाद भी उनका नाम इजराइली सेना और आम लोगों के दिलों में बसा हुआ है। एंटेबे ऑपरेशन को विश्व इतिहास की सबसे साहसिक छुटकारा कार्रवाई माना जाता है।
उस समय युगांडा में फिलिस्तीनी आतंकियों ने इजराइली विमान के यात्रियों को बंधक बनाया था। योनी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में बंधकों को बचाया गया लेकिन योनी शहीद हो गए।