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चुनाव से पहले नेतन्याहू पर बढ़ा दबाव, अपने ही गठबंधन के नेता बनाने लगे दूरी

इजराइल में चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सीजफायर विवाद, गठबंधन नेताओं की नाराजगी और विपक्ष के हमलों के बीच जानिए क्यों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं नेतन्याहू।
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Jun 14, 2026
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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो - आईएएनएस)

Benjamin Netanyahu: इजराइल में आगामी चुनावों से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर राजनीतिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। लेबनान के साथसीजफायर को लेकर देश के भीतर असंतोष देखने को मिल रहा है और अब सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि नेतन्याहू के अपने गठबंधन के नेता भी उनकी रणनीति पर सवाल उठाने लगे हैं।

इजराइली राजनीति में यह चर्चा तेज है कि युद्ध और सुरक्षा के मुद्दों पर नेतन्याहू द्वारा किए गए कई वादे पूरे नहीं हो सके। ऐसे में चुनाव नजदीक आते ही कई नेता खुद को प्रधानमंत्री से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह है कि गठबंधन के कुछ नेता भी अब खुलकर अपनी अलग राय रख रहे हैं।

सीजफायर को लेकर बढ़ी नाराजगी

रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान के साथ हुए युद्धविराम को इजराइल में कई लोग सकारात्मक नजर से नहीं देख रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल किए बिना हमले रोकने का फैसला किया है।

विपक्षी दलों के साथ-साथ नेतन्याहू के गठबंधन के कुछ नेता भी इस मुद्दे पर असहमति जता रहे हैं। उनका मानना है कि लेबनान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए थी और सरकार को अधिक सख्त रुख अपनाना चाहिए था।

गठबंधन के नेताओं ने भी उठाए सवाल

राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने सार्वजनिक रूप से कठोर कार्रवाई की वकालत की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ इलाकों और लक्ष्यों को पूरी तरह तबाह करने की बात कही। इसी तरह वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने भी सरकार के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए हैं।

इन बयानों को नेतन्याहू पर बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव नजदीक होने के कारण कई नेता अपनी अलग पहचान बनाने और मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

नेतन्याहू को 'कमजोर' दिखाने की कोशिश

विपक्षी दलों और कुछ गठबंधन नेताओं का आरोप है कि नेतन्याहू अपने घोषित राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सके। आलोचकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी प्रशासन पर उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा है।

प्रधानमंत्री के विरोधी इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सरकार की नीतियों के कारण इजराइल को अपेक्षित रणनीतिक लाभ नहीं मिला।

अक्टूबर चुनाव पर टिकी नजर

इजराइल में अगले चुनाव अक्टूबर में होने की उम्मीद है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। कई नेता खुद को नेतन्याहू से अलग दिखाने और उनकी कमजोरियों को उजागर करने में जुटे हैं।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि चुनाव से पहले सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव बड़ा मुद्दा बने रह सकते हैं। इसी वजह से नेतन्याहू की हर राजनीतिक और सैन्य रणनीति पर करीबी नजर रखी जा रही है।

बढ़ते दबाव के बीच क्या होगी नेतन्याहू की रणनीति?

इजराइल की राजनीति फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। एक तरफ विपक्ष और गठबंधन के कुछ नेता नेतन्याहू को घेरने में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके समर्थक अभी भी उन्हें देश की सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत नेता बताते हैं।

चुनाव से पहले आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या नेतन्याहू अपने विरोधियों के आरोपों का जवाब दे पाते हैं या फिर बढ़ता राजनीतिक दबाव उनके लिए नई चुनौतियां खड़ी करता है।

Updated on:
14 Jun 2026 06:47 pm
Published on:
14 Jun 2026 05:39 pm