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4 दिन काम, स्कूल-ऑफिस बंद, फिर भी पाक को अब डूबने से ट्रंप भी नहीं बचा पाएंगे? आ गया एक और बड़ा संकट

पाकिस्तान के विदेशी रिजर्व 2028 तक सिर्फ 1.6 बिलियन डॉलर रह जाएंगे। तेल की महंगाई और पुरानी नीतियों से देश गहरे संकट में है।

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May 02, 2026
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

पाकिस्तान की आर्थिक हालत एक बार फिर बेहद चिंताजनक हो गई है। अगर मौजूदा नीतियां नहीं बदली गईं तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार 2028 तक गिरकर महज 1.6 बिलियन डॉलर रह जाएंगे। यह जानकारी साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर तेल की कीमतें 2026 की दूसरी तिमाही में औसतन 113 डॉलर प्रति बैरल रहती हैं और आयात व रेमिटेंस पर कोई काबू नहीं हुआ तो पाकिस्तान के विदेशी रिजर्व 2026 के अंत तक 6.8 बिलियन डॉलर तक गिर सकते हैं।

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इसके बाद स्थिति और बिगड़ते हुए 2028 तक 1.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। पाकिस्तान के पास तेल की बढ़ती कीमतों को झेलने की बहुत कम जगह है। देश आयातित ऊर्जा पर काफी निर्भर है और उसके विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही बहुत पतले हैं।

सरकारी बचत के उपाय भी नाकाफी

मार्च से पाकिस्तान सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सरकारी दफ्तरों में चार दिन काम, वर्क फ्रॉम होम की छूट, स्कूल दो हफ्ते बंद और सरकारी गाड़ियों पर ईंधन भत्ता कम कर दिया गया है।

उधर, जानकारों का कहना है कि ये उपाय तुरंत राहत तो दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय में महंगाई बढ़ाएंगे, घरेलू कमी पैदा करेंगे और विकास को रोकेंगे।

IMF कार्यक्रम भी कमजोर

अभी आईएमएफ का लोन पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने और महंगाई से बचाने में मदद कर रहा है। लेकिन रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह रिकवरी बहुत नाजुक है।

IMF की मदद पाने के लिए पाकिस्तान को सख्त शर्तें पूरी करनी पड़ रही हैं। टैक्स बढ़ाना, खर्चे पर काबू और सुधार लाना जरूरी है।

अगर ये शर्तें पूरी नहीं हुईं तो कार्यक्रम फेल हो सकता है। मध्य पूर्व युद्ध का असरपाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है।

इससे वह मध्य पूर्व के संघर्ष के केंद्र में आ गया है। लेकिन जब तक स्थायी शांति नहीं आती, पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था युद्ध के झटकों से बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

सऊदी पर बढ़ती निर्भरता

एक और रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है। इससे उसकी विदेश नीति भी प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप भी नहीं बचा पाएंगे

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों पाकिस्तान की जमकर तारीफ कर रहे हैं। ईरान से मध्यस्थता कराने में मुख्य भूमिका निभाने के लिए ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की खुलकर तारीफ की है।

लेकिन अभी पाक के जो हालात हैं, उसे देखकर यही अनुमान जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति भी फिलहाल उसकी मदद नहीं कर पायेंगे।

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