चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने का विधेयक टल गया है। इस विधेयक के स्थगित होने में अमेरिका की क्या भूमिका रही, आइए जानते हैं।
ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के अपने प्रस्तावित समझौते को स्थगित (Hold on) कर दिया है। चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने का प्रस्तावित कानून ब्रिटेन को फिलहाल टालना पड़ा है, क्योंकि अमरीका ने इस समझौते से अपना समर्थन वापस ले लिया है।
ब्रिटेन सरकार ने चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के प्रस्तावित समझौते को स्थगित कर दिया है। सरकार ने स्वीकार किया कि मौजूदा संसदीय सत्र समाप्त होने से पहले संबंधित विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया है।
चागोस द्वीप समूह में स्थित डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित समझौते के तहत ब्रिटेन द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपकर डिएगो गार्सिया को 99 वर्ष के लिए लीज पर रखना चाहता था। हालांकि, 1966 की द्विपक्षीय संधि में संशोधन पर औपचारिक सहमति नहीं बनी और अमेरिकी समर्थन वापस लेने से पूरी प्रक्रिया रुक गई है। अब इस विधेयक को अगले संसदीय सत्र के एजेंडे में शामिल करने की संभावना भी कम नजर आ रही है। ट्रंप ने इस समझौते को बड़ी मूर्खता करार देते हुए विरोध जताया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को चेतावनी दी थी कि डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण ठिकाने को किसी तीसरे पक्ष को सौंपना अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके बाद ब्रिटेन सरकार ने स्पष्ट किया था कि वे अमेरिकी समर्थन के बिना आगे का कदम नहीं उठाएंगे।
चागोस मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट रूप से मॉरीशस के समर्थन में रही है। भारत ने हमेशा उपनिवेशवाद की समाप्ति के सिद्धांत के तहत मॉरीशस के दावे को वैध माना है। भारत ने चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के समझौते को 'महत्वपूर्ण उपलब्धि' बताया था। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत की सुरक्षा और समुद्री हितों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
चागोस द्वीप समूह समझौते के अटकने से क्षेत्र में रणनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि इससे चीन जैसी बाहरी शक्तियों को क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उसे अपनी कूटनीतिक और सामरिक रणनीति को और अधिक सक्रिय बनाना पड़ सकता है। ताकि क्षेत्रीय संतुलन बरकरार रहे और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित हो।
भारत मॉरीशस के साथ निकट सहयोग बढ़ा रहा है और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। चागोस विवाद का समाधान भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यह घटनाक्रम हिंद महासागर में भू-राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकता है। ब्रिटेन और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेद तथा मॉरीशस की प्रतिक्रिया अब इस मुद्दे के भविष्य को तय करेंगे।