
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- IANS)
लैटिन अमेरिकी देशों में चीन से जुड़े बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अब वहां की सरकारों और संस्थाओं की स्वतंत्रता को चुनौती दे रहे हैं। तेज रफ्तार से बन रहे ये प्रोजेक्ट्स लोकल निगरानी, पारदर्शिता और तकनीकी जांच को पीछे छोड़ रहे हैं, जिससे लंबे समय में इन देशों पर चीन की निर्भरता बढ़ती जा रही है।
एक नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। REDCAEM की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से जुड़े प्रोजेक्ट्स इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं कि लोकल एजेंसियों को उन्हें ठीक से जांचने या लोगों से सलाह-मशविरा करने का मौका ही नहीं मिल पाता।
राजनीतिक और आर्थिक फायदे तो तुरंत दिखते हैं, लेकिन पारदर्शिता, पर्यावरण सुरक्षा और अच्छे शासन के नियम कमजोर पड़ जाते हैं।
REDCAEM की डायरेक्टर पामेला अरोस्टिका ने कहा कि कई बार देशों को बाहरी फंडिंग की रफ्तार के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। इससे संस्थागत प्रक्रियाएं कमजोर हो जाती हैं।
लैटिन अमेरिका देशों में ज्यादातर प्रोजेक्ट्स टर्नकी सिस्टम में चलाए जा रहे हैं। यानी इंजीनियर, मजदूर और सामान सब चीन से आता है। लोकल कंपनियों और लोगों को बहुत कम काम मिलता है।
इससे न सिर्फ रोजगार के मौके कम होते हैं बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्थिक फैसलों पर भी चीन का नियंत्रण बढ़ जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से जुड़े लोन और प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बहुत कम होती है।
पर्यावरण और गवर्नेंस के नियम भी लगभग नहीं के बराबर होते हैं। इससे लैटिन अमेरिका के देशों में संस्थागत स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चीन का कर्ज पुनर्गठन का तरीका भी दूसरे देशों जितना लचीला नहीं है। भारी कर्ज में डूबे देशों पर इससे और दबाव पड़ता है। कई देश अब अपनी रणनीतिक फैसले लेने की क्षमता खोते जा रहे हैं।
चीन की कंपनियां लैटिन अमेरिका के महत्वपूर्ण संसाधनों पर गहरी पकड़ बना रही हैं। पेरू में तांबा, अर्जेंटीना और चिली में लिथियम जैसी खदानों में इनकी बड़ी भूमिका है। ये क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि चीन का यह मॉडल लैटिन अमेरिकी देशों के राज्य प्रबंधन और रणनीतिक फैसलों को प्रभावित कर रहा है। कई देश अब समझ रहे हैं कि तेज विकास के चक्कर में लंबी अवधि की स्वतंत्रता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
रिपोर्ट में साफ सुझाव दिया गया है कि इन देशों को अपनी बातचीत, मूल्यांकन और निगरानी की क्षमता मजबूत करनी होगी। बिना ठीक से जांचे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने से बचना चाहिए। वरना रणनीतिक निर्भरता बढ़ेगी और संस्थागत स्वतंत्रता कमजोर होगी।
Updated on:
13 Jun 2026 05:27 pm
Published on:
13 Jun 2026 05:27 pm
