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चीन का नया कारनामा, मात्र 60 मिनट में 1000 किमी का सफर… कुछ सेकेंड में पार हुए कई शहर

Ultra High Speed Train China: चीन ने 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अत्याधुनिक ट्रेन का एडवांस स्टेज परीक्षण किया है।

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May 06, 2026
दुनिया को चौंकाने की तैयारी में चीन (AI जनरेटेड इमेज)

Vacuum Tube Train China: चीन एक बार फिर दुनिया को चौंकाने की तैयारी में है। चीन ने 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अत्याधुनिक ट्रेन का एडवांस स्टेज परीक्षण किया है। यह ट्रेन पारंपरिक रेलवे तकनीक से अलग मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लेव) और लो-वैक्यूम ट्यूब सिस्टम पर आधारित है, जिसे भविष्य की परिवहन क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।

इस ट्रेन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें एक लंबी वैक्यूम ट्यूब के भीतर ट्रेन को चलते हुए दिखाया गया है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन मैग्नेटिक फोर्स के सहारे पटरियों से ऊपर उठकर चलती है, जिससे घर्षण लगभग समाप्त हो जाता है और ट्रेन 1000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है। यह गति कई मामलों में हवाई जहाज से भी तेज है। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार यह अल्ट्रा हाई-स्पीड लो-वैक्यूम ट्यूब मैग्लेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। इसका उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा को बेहद कम समय में पूरा करना है।

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इस ट्रेन की एक और खासियत इसकी डिजिटल क्षमता है। इतनी तेज गति के बावजूद यात्री बिना रुकावट के 5जी इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे। चीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कई वर्षों से काम कर रहा है। इससे पहले चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ने शांसी प्रांत के एक परीक्षण क्षेत्र में इस तकनीक का ट्रायल किया था। वहां लगभग 2 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के भीतर वैक्यूम तैयार कर ट्रेन को सफलतापूर्वक चलाया गया था।

दिल्ली से पटना…सिर्फ एक घंटे में

इस ट्रेन की गति की तुलना दिल्ली से पटना के बीच की दूरी से करें तो यह करीब एक घंटे में पूरी की जा सकती है। इससे न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी। इसी तरह चीन के राजधानी बीजिंग से शंघाई के बीच लगभग 1200 किलोमीटर की दूरी को यह ट्रेन सिर्फ 90 मिनट से भी कम समय में तय कर सकेगी।

4000 किमी प्रति घंटे तक ले जाने की योजना

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेन को व्यावसायिक रूप से शुरू होने में अभी समय लगेगा। अनुमान है कि 2027 से 2035 के बीच यह प्रोजेक्ट आम यात्रियों के लिए उपलब्ध हो सकेगा है। इसके साथ ही चीन भविष्य में इस तकनीक की स्पीड को 4000 किमी प्रति घंटे तक ले जाने की योजना भी बना रहा है, जो इसे और भी क्रांतिकारी बना सकती है।

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