
WHO Food Safety Report: अगर आपको लगता है कि स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ स्ट्रीट फूड, खुले में बिकने वाला खाना या फास्ट फूड है, तो यह धारणा बदलने का समय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट 'ग्लोबल बर्डन ऑफ फूडबॉर्न डिजीजेज 2000-2021' बताती है कि खेत से रसोई तक की पूरी खाद्य शृंखला में मौजूद रासायनिक और जैविक प्रदूषण दुनिया के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार दूषित भोजन से हर दिन औसतन 42 लाख से ज्यादा लोग बीमार पड़ रहे हैं और करीब 4,100 लोगों की मौत हो रही है। यह 2015 के बाद डब्ल्यूएचओ की पहली बड़ी वैश्विक अपडेटेड रिपोर्ट है। दूषित भोजन का बोझ अब टीबी, एचआईवी और मलेरिया जैसी चुनौतियों की श्रेणी में पहुंच चुका है।
फूड पॉइजनिंग का मतलब अकसर बैक्टीरिया और वायरस से जोड़ा जाता है, लेकिन वर्ष 2021 में दूषित भोजन से हुई करीब 73 प्रतिशत मौतों के पीछे रासायनिक प्रदूषक जिम्मेदार थे। इनमें आर्सेनिक, सीसा और कीटनाशकों के अवशेष प्रमुख हैं। इनसे जुड़े रोगों का सबसे बड़ा बोझ भारत और चीन पर है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भोजन जनित बीमारियों के लगभग 75 प्रतिशत मामले अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दर्ज किए गए। वैश्विक स्तर पर ऐसी 60 प्रतिशत मौतें भी इन्हीं क्षेत्रों में हुईं, जिनमें भारत और उसके पड़ोसी देश शामिल हैं।
पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दूषित भोजन से बीमार होने और मौत का जोखिम वयस्कों की तुलना में लगभग 2.7 गुना अधिक पाया गया। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण बच्चे भोजन में मौजूद बैक्टीरिया और रासायनिक प्रदूषकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।हैं।
बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन भोजन में बैक्टीरिया के प्रसार को तेज कर रहे हैं। वहीं, एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से कई जीवाणु दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन चुके हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे संक्रमणों से लड़ना चुनौती होगा, जिनका इलाज पहले से अधिक कठिन होता जा रहा है।