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US-Iran Tension: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बढ़ाई सख्ती, 12 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला

US naval blockade: अमेरिकी सेंटकॉम ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी के तहत 12 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया, दो जहाजों पर बोर्डिंग की गई और नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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US Central Command on Iran.

अमेरिकी सैनिक (Photo- IANS)

US-Iran War: अमेरिका ने भले ही पिछले दो सप्ताह से जारी सैन्य तनाव के बीच भले ही शनिवार की रात ईरान पर एयरस्ट्राइक नहीं की है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है। दरअसल, अमेरिकी नौसेना सेना ने ईरान की नाकेबंदी कर रखी, जिसकी वजह से कई व्यापारिक जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ा है। इसकी जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड की तरफ से सोशल मीडिया 'एक्स' पर दी गई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्या कहा?

इस संबंध में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू है। 25 जुलाई तक सेंटकॉम ने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे 12 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया है। आदेश नहीं मानने वाले दो जहाजों को निष्क्रिय किया है और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए दो जहाजों पर बोर्डिंग की है।'

मेरिकी सेंट्रल कमांड ने आगे कहा, 'आज इससे पहले अमेरिकी बलों ने अरब सागर में कोमोरोस के झंडे वाले टैंकर एम/टी चारमिनार पर सत्यापन के लिए बोर्डिंग की कार्रवाई पूरी की। जांच पूरी होने के बाद टैंकर को अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी गई।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पोस्ट में आगे कहा, '24 जुलाई को सेंटकॉम बलों ने ओमान की खाड़ी में मोजाम्बिक के झंडे वाले टैंकर एम/टी लैविन (M/T Lavine) को निष्क्रिय कर दिया। सेंटकॉम के अनुसार, जहाज के चालक दल ने कई बार नाकेबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास किया और बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया। इसके बाद यह जहाज अब ईरान की ओर आगे नहीं बढ़ रहा है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि अमेरिकी बल पूरी तरह सतर्क, मिशन पर केंद्रित, घातक क्षमता से लैस और हर स्थिति के लिए तैयार हैं।'

दावा- अमेरिका को भड़का रहा इजरायल

ईरान की IRGC ने इजरायल पर बड़ा आरोप लगाया है। उसका कहना है कि ईरान के खिलाफ इजरायल अमेरिका को भड़का रहा है। IRGC ने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल झूठी जानकारी दे रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में अपनी उपस्थिति बनाए रखे। उसका मानना है कि इजरायल अपने रणनीतिक लक्ष्यों को अमेरिकी क्षमताओं के जरिए हासिल करना चाहता है।