विदेश

ईरान युद्ध में अमेरिका के 50% हथियार खत्म: सता रहा रूस-चीन का डर, अब क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच लंबे समय तक चले युद्ध का असर पूरे मिडिल ईस्ट (Middle East) पर हुआ है। इस युद्ध से अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है। ईरान युद्ध में अमेरिका को आर्थिक और आयुध में हुए नुकसान को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

2 min read
Apr 23, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- IANS)

Middle East Conflict: ईरान से करीब 7 हफ्तों तक चले भीषण संघर्ष ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अमरीका को एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इसका खुलासा पेंटागन के आंतरिक आकलन और 'सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' की नई रिपोर्ट में हुआ है। CSIS के मुताबिक, ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपनी मिसाइलों का आधा भंडार खत्म कर दिया है।

ये भी पढ़ें

पहलगाम हमले की बरसी: उमर अब्दुल्ला की पाकिस्तान को चेतावनी, कहा- मुंहतोड़ जवाब देंगे, दोबारा ऐसा हमला नहीं करने देंगे

अमेरिका के 50 फीसदी हथियार खत्म

CSIS ने रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध में मिसाइलों का आधा भंडार खत्म करने के बाद अमेरिका के पास चीन और रूस जैसे 'समान प्रतिद्वंद्वियों' से निपटने के लिए पर्याप्त आयुध नहीं बचा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान ऑपरेशंस के दौरान अपनी महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणालियों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा गंवा दिया है। जिससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में 'रणनीतिक कमजोरी' की एक खतरनाक संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

अमेरिका को सता रही चिंता

अमेरिकी सीनेट की रणनीतिक बल उपसमिति की अध्यक्ष सीनेटर देब फिशर ने संसद की पटल पर कहा है कि चीन जिन 'सांसें थाम देने वाली' रफ्तार से परमाणु ताकत बढ़ा रहा है, उसके सामने अमरीका की चुनौतियां ऐतिहासिक हैं। देब फिशर ने कहा- चीन हमारी अनुमानित सीमाओं से कहीं अधिक तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। यह बताता है कि संकट केवल मिसाइलों के खत्म होने का नहीं है, बल्कि प्रतिद्वंद्वी के बहुत आगे निकल जाने का भी है।

प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलें का भंडार सूखा

CSIS के विश्लेषण और रक्षा विभाग के गोपनीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी सेना ने अपने 'पैट्रियट' वायु रक्षा इंटरसेप्टर का लगभग 50%, बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली 'थाड' मिसाइलों का आधा भंडार और 'प्रिसिजन स्ट्राइक' मिसाइलों का करीब 45% हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। इसके अलावा टॉमहॉक और लंबी दूरी की JASSM मिसाइलों में भी 20 से 30 प्रतिशत की भारी कमी आई है।

नाटो में दरार और दोहरे परमाणु खतरे का डर

एक तरफ अमरीका के पास गोला-बारूद की कमी है तो दूसरी तरफ इतिहास में पहली बार उसे रूस और चीन के रूप में 'दोहरे परमाणु खतरों' का सामना करना पड़ रहा है। सहायक रक्षा सचिव रॉबर्ट कैडलेक ने इसे 'अभी का संकट' बताया है।
ईरान युद्ध में साथ नहीं देने वाले नाटो सहयोगियों- स्पेन, तुर्की, इटली और जर्मनी से डोनाल्ड ट्रंप नाराज हैं। डोनाल्ड ट्रंप NATO को 'कागजी शेर' बता चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने NATO गठबंधन से हटने और साथ नहीं देने वाले देशों से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की धमकी भी दी है। मिसाइलों की कमी और नाटो सहयोगियों से तल्खी ने अमरीका को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां वह रूस और चीन की संयुक्त चुनौती के आगे असहाय नजर आ सकता है।

ये भी पढ़ें

रिफाइनरी अग्निकांड: PM मोदी की सुरक्षा में चूक या साजिश? घटना की जांच करने दिल्ली से आई स्पेशल टीम
Also Read
View All