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‘बिना डर के लोगों को शांतिपूर्ण विरोध करने का मौका मिलना चाहिए’, UN में उठा दिल्ली छात्र प्रदर्शन का मुद्दा

UN reacts to Delhi Protest: दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को उत्पीड़न, गिरफ्तारी या चोट के डर के बिना अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
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Jul 25, 2026
UN Spox Stéphane Dujarric
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक (फोटो- Sidhant Sibal एक्स पोस्ट)

Delhi Protest: दिल्ली में चल रहा छात्र प्रदर्शन एक तरफ जहां राष्ट्रीय चर्चा का मुद्दा बना हुआ है वहीं अब इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सवाल उठने लगे है। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखती पूरे देश में फैल गया। भारी संख्या में छात्र और अन्य लोग इस प्रदर्शन से जुड़ने लगे है। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आई है। इसी कड़ी में अब संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को अनुमति मिलनी चाहिए।

स्टीफन दुजारिक ने दी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक (Stéphane Dujarric) ने दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दिल्ली में हो रहे छात्र प्रदर्शनों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि जो लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं, उन्हें उत्पीड़न, गिरफ्तारी या चोट लगने के डर के बिना ऐसा करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक मूल्यों का अहम हिस्सा है और लोगों को अपने अधिकारों का प्रयोग सुरक्षित माहौल में करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि दुनिया के हर देश की तरह भारत में भी सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करें।

NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर हो रहा प्रदर्शन

दिल्ली में यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है। 20 जुलाई को हजारों छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी जंतर मंतर से संसद की ओर संसद चलो मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए जब पुलिस ने बैरिकेड लगाए और भीड़ को रोकने की कोशिश की। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अदालत में याचिकाएं भी दायर की गईं।

पुलिस का दावा, कई लोग हुए घायल

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान करीब 130 पुलिसकर्मी और लगभग 65 प्रदर्शनकारी घायल हुए। इस मामले में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर और उसके आसपास हर दिन औसतन 10,000 लोग मौजूद रहते हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी की और हिंसा भड़काने की कोशिश की, जिसके कारण स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

UN के बयान से बढ़ा चर्चा

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की सामने आने से मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई है। हालांकि UN ने अपने बयान में किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया, लेकिन इतना साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।

Updated on:
25 Jul 2026 02:45 pm
Published on:
25 Jul 2026 02:05 pm