US Elections: डोनाल्ड ट्रंप ने 'Truth Social' पर मांग की है कि अमेरिकी चुनावों में केवल देश के नागरिकों को ही वोट देने का अधिकार होना चाहिए। उनके इस कड़े बयान ने अमेरिका की राजनीति और चुनाव सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
Voting Rights: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने चुनाव प्रणाली और मतदान अधिकारों को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक अहम पोस्ट करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं केवल यह चाहता हूं कि अमेरिकी चुनावों (US Elections) में सिर्फ अमेरिकी नागरिक ही वोट दें!" उनका यह बयान अमेरिका की राजनीति में एक नई और तेज बहस को जन्म दे रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में अवैध प्रवासियों और चुनाव सुरक्षा को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ही चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और कड़े नियमों की वकालत करते रहे हैं। इस छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली संदेश के जरिए ट्रंप ने अपने समर्थकों और देशवासियों को यह बताने की कोशिश की है कि अमेरिका की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाहरी लोगों या गैर-नागरिकों का कोई दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल, अमेरिका के कई राज्यों में इस बात को लेकर लंबे समय से राजनीतिक खींचतान चल रही है। हालांकि अमेरिका के संघीय (Federal) चुनावों में कानूनी तौर पर केवल अमेरिकी नागरिकों को ही वोट डालने का अधिकार है, लेकिन कुछ स्थानीय चुनावों में गैर-नागरिकों को वोटिंग की छूट देने की बहस अक्सर उठती रहती है। ट्रंप का यह पोस्ट इसी चिंता को जाहिर करता है। उनका स्पष्ट मानना है कि चुनाव व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने की सख्त जरूरत है ताकि देश में किसी भी तरह का फर्जी मतदान या चुनाव में धांधली न हो सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह रुख उनकी प्रसिद्ध 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) नीति का ही एक अहम हिस्सा है। इस बयान के जरिए उन्होंने एक बार फिर अपनी उस कोर-वोटर बेस (Core Voter Base) को साधने का प्रयास किया है, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा और कड़े आव्रजन (Immigration) नियमों का समर्थन करता है।
ट्रंप के इस बयान पर अमेरिका में राजनीतिक दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। रिपब्लिकन समर्थकों और रूढ़िवादी नेताओं ने ट्रंप के इस पोस्ट का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह सबसे जरूरी कदम है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बयान केवल अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के बीच डर पैदा करने की एक राजनीतिक चाल है, क्योंकि राष्ट्रीय चुनावों में पहले से ही गैर-नागरिक वोट नहीं दे सकते हैं।
इस बयान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन 'वोटर रजिस्ट्रेशन' (मतदाता पंजीकरण) के लिए नागरिकता का सुबूत पेश करने को राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य बनाने के लिए कोई नया कानून या कार्यकारी आदेश (Executive Order) लाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ट्रंप की रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और नीतियों में यह मुद्दा सबसे प्रमुखता से उठाया जाएगा और राज्यों की चुनाव प्रणाली पर कड़े नियम लागू करने का दबाव बनाया जाएगा।
इस मुद्दे का एक बड़ा 'साइड एंगल' अमेरिका का सीमा विवाद और आव्रजन भी है। अमेरिका-मेक्सिको सीमा से आने वाले अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर ट्रंप हमेशा से बेहद सख्त रहे हैं। अब उन्होंने इस प्रवासी मुद्दे को सीधे तौर पर चुनाव की शुचिता (Election Integrity) से जोड़ दिया है। इसके अलावा, एलन मस्क जैसी बड़ी हस्तियां भी हाल के दिनों में बिना नागरिकता वाले लोगों के वोटिंग अधिकारों पर सवाल उठा चुकी हैं, जिससे डोनाल्ड ट्रंप के इस नैरेटिव को और ज्यादा सामाजिक और डिजिटल बल मिल रहा है।