विदेश

ईरान युद्ध में कैसे बढ़ गई ट्रंप की संपत्ति? उनके दोस्त भी हो गए मालामाल, अमेरिका को फायदा या नुकसान, यहां समझें

ईरान युद्ध में गरीब देशों के लोग मर रहे हैं, जबकि अमेरिका जैसे अमीर देश और अमीर हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट के जानकार वाइल अव्वाद ने कहा कि इस युद्ध से अमेरिका काफी मालामाल हो गया है। युद्ध का असली फायदा हमेशा शक्तिशाली देशों को ही होता है।

3 min read
Mar 30, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- AI)

जब दुनिया में कहीं युद्ध होता है तो सबसे पहले यह सवाल उठता है कि इससे असली में फायदा किसको हो रहा है? जहां गरीब देशों के लोग मर रहे होते हैं, वहीं अमेरिका जैसे अमीर देश और अमीर होते जाते हैं।

अभी भी यही हो रहा है। ईरान युद्ध से अमेरिका काफी मालामाल हो गया है। यह बात किसी आम आदमी ने नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट के जाने-माने जानकार वाइल अव्वाद ने कही है।

ये भी पढ़ें

US-Israel-Iran War: जरा हटके.. जंग से दूर, जायके और जेवर के साथ दिल जीत रहा ईरान

बढ़ी रही ट्रंप की संपत्ति

  • अव्वाद ने एएनआई से बात करते हुए सीधे तौर पर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप यह युद्ध इसलिए खींच रहे हैं क्योंकि उनके अरबपति दोस्तों को इससे फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की अपनी संपत्ति में जो बढ़ोतरी हुई है, वो खुद ही इस बात का सबूत है।
  • उनका कहना है कि ट्रंप चारों तरफ से अरबपतियों से घिरे हुए हैं और इजराइल के प्रधानमंत्री जो कहते हैं, ट्रंप वही करते हैं। अमेरिका में भी लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • अव्वाद ने कहा कि ट्रंप अपने अरबपति साथियों को खुश करने और इजरायल के एजेंडे को पूरा करने के लिए इस युद्ध को लंबा खींच रहे हैं।

खार्ग द्वीप पर अमेरिकी कमांडो पकड़े गए? तेहरान का दावा

ट्रंप भले ही कह रहे हों कि उन्होंने ईरान की नौसेना को "खत्म" कर दिया, लेकिन तेहरान से आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

अव्वाद के मुताबिक ईरान का दावा है कि अमेरिकी मरीन और कमांडो खार्ग द्वीप पर जमीनी हमले की कोशिश में पकड़े गए। खार्ग द्वीप ईरान का सबसे अहम तेल केंद्र है। अगर यह दावा सच है तो यह युद्ध की दिशा बदलने वाली खबर है।

ईरान कमजोर नहीं, 19,500 लोगों की हत्या का बदला लेने के लिए तैयार बैठा

अव्वाद ने साफ किया कि ईरान कोई कमजोर देश नहीं है जो झुक जाएगा। इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान लगातार इसी दिन की तैयारी करता आया है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दशों में मोसाद और CIA की गुप्त कार्रवाइयों में ईरान के 19,500 से ज्यादा वैज्ञानिक, नौकरशाह और नेता मारे जा चुके हैं।

इस दर्द को ईरान भूला नहीं है। इसीलिए वो 9,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले कर चुका है और उसके पास अभी 15,000 और ठिकानों की सूची तैयार है।

खाड़ी देश अब अमेरिकी अड्डों की रक्षा खुद कर रहे हैं, उल्टा हो गया खेल

हम सब यही सोचते थे कि खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे उन देशों की रक्षा के लिए हैं। लेकिन अव्वाद ने बताया कि अब हो यह रहा है कि अरब देश खुद अमेरिकी अड्डों की रखवाली कर रहे हैं।

जब इजराइल ने कतर पर हमला किया तो अमेरिका चुप रहा। अब जब ईरान इन अड्डों पर हमले कर रहा है तो अरब देशों के सैनिक उनकी रक्षा में जुटे हैं। यह खेल पूरी तरह उलटा हो गया है।

5 लाख करोड़ डॉलर की लूट और अब 'निकल जाओ' की मांग

  • अव्वाद ने बेबाकी से कहा कि अमेरिका ने खाड़ी देशों को लूटा है। ट्रंप खुद गर्व से कह चुके हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र से 5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा खींचे हैं।
  • अब खाड़ी देशों को यह समझ आ रहा है कि इन अमेरिकी अड्डों से उनका कोई भला नहीं हुआ, बस उनकी जेबें खाली हुई हैं।
  • यही वजह है कि अब इन देशों में एक नई सोच उभर रही है कि ईरान समेत सभी क्षेत्रीय ताकतें मिलकर एक सुरक्षा समझौता बनाएं और अमेरिका को अपने अड्डे समेटने के लिए कहें।

ईस्टर पर 'डर्टी बम' का डर, क्या युद्ध और बड़ा होगा?

इस बीच, अव्वाद ने एक गंभीर चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि ईस्टर के आसपास किसी बड़ी साजिश या 'डर्टी बम' जैसी घटना का डर है जो दक्षिण एशिया में अफरातफरी मचा सकती है।

ट्रंप हर रोज नए-नए बयान दे रहे हैं और साथ में और सैनिक भेजे जा रहे हैं। ऐसे में यह युद्ध और बड़ा होने का खतरा बना हुआ है।

ये भी पढ़ें

Iran-Israel War में खुल गया एक और मोर्चा, यमन के हूती ने इजरायल पर दागी मिसाइलें

Also Read
View All

अगली खबर