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अपने ही देश के नेताओं पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, बोले-‘ईरान झुक जाए, फिर भी डेमोक्रेट्स और मीडिया सच नहीं दिखाएंगे’

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पूरी तरह सरेंडर भी कर दे, तब भी उनके राजनीतिक विरोधी और मीडिया इसे अमेरिका की नहीं, बल्कि ईरान की जीत बातएंगे।
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Updated: 2 Jun 2026, 3:59 PM IST
Donald Trump
डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)

US Iran Tensions: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राजनीतिक विरोधियों और मीडिया पर निशाना साधा है। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान पूरी तरह अमेरिका के सामने झुक जाए और सैन्य रूप से सरेंडर भी कर दे, तब भी डेमोक्रेटिक पार्टी और कुछ मीडिया संस्थान सच्चाई को अलग तरीके से पेश करेंगे।

सोशल मीडिया ट्रुथ पर पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह खत्म हो जाए, उसकी सेना हथियार डाल दे और ईरानी नेतृत्व औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दे, तब भी उनके आलोचक इसे अमेरिका की जीत नहीं मानेंगे। ट्रंप के मुताबिक, ऐसे लोग फिर भी यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि ईरान किसी न किसी रूप में विजेता रहा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बहस जारी है।

एग्रीमेंट को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थानों की आलोचना करते हुए कहा कि वे सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। उन्होंने डेमोक्रेट्स पर भी हमला बोला और कहा कि वे वास्तविकता से दूर हो चुके हैं।

हालांकि, तीखे हमलों के बीच ट्रंप ने एक सकारात्मक संकेत भी दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द ही ऐसा एग्रीमेंट हो सकता है, जिससे तनाव कम होगा और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग फिर से सामान्य रूप से खुल सकेंगे। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

इससे पहले सोमवार को US प्रेसिडेंट ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि करीब दो महीने पहले कई हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम (सीजफायर) हुआ था। लेकिन हाल ही में अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। सप्ताहांत और सोमवार तक दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं।

इन घटनाओं के बाद यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं युद्धविराम टूट न जाए। साथ ही, विशेषज्ञों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर भी असर पड़ सकता है और कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है।

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