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वतन वापसी से पहले शेख हसीना को लगा बड़ा झटका, राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इस्तीफे के क्या है सियासी मायने

Sheikh Hasina: बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला शेख हसीना की प्रस्तावित वतन वापसी से पहले आया है, जिससे देश की राजनीति और कानूनी माहौल में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
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भारत

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Himadri Joshi

•

Jul 25, 2026

Sheikh Hasina

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना। (Photo-ANI)

Bangladesh President Resigns: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने फिर से बांग्लादेश लौटने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें पता है कि देश लौटने पर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा और फांसी भी दी जा सकती है लेकिन उन्होंने इन जोखिमों के बावजूद वतन वापसी का फैसला किया है। इन सबके बीच उन्हें बड़ा सियासी झटका लगा है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हसीना के बांग्लादेश लौटने से पहले राष्ट्रपति का पद छोड़ना केवल संवैधानिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों का अहम संकेत भी माना जा रहा है। इससे शेख हसीना के सामने नई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने क्यों दिया इस्तीफा?

76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने बयान में कहा कि हाल की मेडिकल जांच में उन्हें ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता चला है। इस बीमारी के कारण उन्हें कभी-कभी अचानक बेहोशी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि हाल ही में शेख हसीना और राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के बीच में एक सीक्रेट फोन कॉल हुई थी जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री तारिक रहमान को हो गई जिसके बाद राष्ट्रपति को कुर्सी छोड़नी पड़ी। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि नए राष्ट्रपति के चुनाव तक राष्ट्रीय संसद के स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारियां संभालेंगे।

शेख हसीना के लिए क्यों बड़ा झटका माना जा रहा है?

मोहम्मद शहाबुद्दीन को शेख हसीना का करीबी माना जाता था। उनके इस्तीफे के बाद अब बांग्लादेश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर हसीना का कोई प्रमुख सहयोगी नहीं बचा है। पिछले साल छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और उन्हें भारत आना पड़ा था। इसके बाद उनकी पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया या वे छिपने पर मजबूर हो गए। अब राष्ट्रपति के इस्तीफे से हसीना की राजनीतिक स्थिति और कमजोर होती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि उनकी प्रस्तावित वापसी के समय उन्हें पहले से ज्यादा सख्त कानूनी और राजनीतिक माहौल का सामना करना पड़ सकता है।

दिसंबर में वापसी की तैयारी, लेकिन चुनौतियां बरकरार

शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के सामने खुद आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और जान का भी खतरा है, लेकिन वह अपने देश की मिट्टी पर लौटना चाहती हैं। हसीना का कहना है कि उनके पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि उन्हें अदालत के फैसले का सामना करना होगा। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी इस पूरे घटनाक्रम का असर पड़ा है, क्योंकि ढाका लगातार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। अब उनकी संभावित वापसी और राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नए घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।