Geopolitical Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बीच ईरान ने 10 लाख सैनिकों की लामबंदी का दावा कर दुनिया को चौंका दिया है।
Middle East Escalation: पश्चिम एशिया के मुहाने पर युद्ध की आहट (War Clouds) अब साफ सुनाई देने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित सैन्य ऑपरेशन की खबरों ने वैश्विक खलबली मचा दी है। इसी बीच ईरान (Tehran) ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए दावा किया है कि उसके 10 लाख लड़ाके (One Million Fighters) किसी भी जमीनी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का पिछला कार्यकाल गवाह है कि वे 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति पर चलते हैं। इस बार भी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनकी योजना बेहद आक्रामक नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन केवल कुछ दिनों का हो सकता है, जिसका लक्ष्य ईरान के नौसैनिक बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करना है। ट्रंप का उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग पर केवल एकतरफा दादागिरी नहीं चलेगी।
ईरान की ओर से आया बयान कि उसके 10 लाख सैनिक तैयार हैं, महज एक आंकड़ा नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) है। ईरान ने अपने 'रिवोल्युशनरी गार्ड्स' और 'बसीज' मिलिशिया को अलर्ट मोड पर रखा है। ईरान का मानना है कि यदि अमेरिका ने होर्मुज में हस्तक्षेप किया, तो वह इस संकीर्ण समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा, जिससे दुनिया भर में तेल का अकाल पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। यदि ट्रंप प्रशासन यहां कोई बड़ा सैन्य एक्शन लेता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 के पार जा सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा इसी मार्ग पर टिकी है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध की एक भी चिंगारी वैश्विक मंदी (Global Recession) को न्यौता दे सकती है।
हालांकि सैन्य लामबंदी जोरों पर है, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। कई यूरोपीय देश और खाड़ी के पड़ोसी राष्ट्र इस तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की शैली अक्सर 'दबाव बनाकर समझौता करने' की रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 10 लाख सैनिकों की धमकी ट्रंप के कदमों को रोक पाएगी या फिर होर्मुज का पानी बारूद की गंध से भर जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की 10 लाख सैनिकों की बात अमेरिका को डराने की कोशिश है, क्योंकि तकनीकी रूप से अमेरिका काफी आगे है। अमेरिकी पेंटागन जल्द ही इस क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोतों की तैनाती पर आधिकारिक बयान जारी कर सकता है। इधर रूस और चीन की इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर है, क्योंकि होर्मुज में अस्थिरता उनके आर्थिक हितों को भी चोट पहुंचाएगी।