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एक ऐसा दांव जिसे युद्ध में अब तक नहीं खेला गया, जंग में आ सकता है नया मोड़!

Iran-Israel War: ईरान पिछले 28 दिनों से अमेरिका और इजराइल की पूरी ताकत का सामना कर रहा है। जंग के दौरान वह अपने पास मौजूद सभी दांव-पेचों का इस्तेमाल करके पलटवार कर रहा है। ईरान की धमकियों के चलते होर्मुज स्टेट में समुद्री यातायात ठप पड़ गया है। इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा […]

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Iran-Israel War

Iran-Israel War (ai garage photo)

Iran-Israel War: ईरान पिछले 28 दिनों से अमेरिका और इजराइल की पूरी ताकत का सामना कर रहा है। जंग के दौरान वह अपने पास मौजूद सभी दांव-पेचों का इस्तेमाल करके पलटवार कर रहा है। ईरान की धमकियों के चलते होर्मुज स्टेट में समुद्री यातायात ठप पड़ गया है। इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इस पूरे क्षेत्र में ईरान के सहयोगी, खासकर लेबनान का हिज़्बुल्लाह, ईरान के समर्थन में लड़ रहे हैं।

एक ऐसा दांव जिसे युद्ध में अब तक नहीं खेला गया

इस जंग में एक ऐसा दांव है, जिसे अभी तक नहीं चला गया है। यमन में ईरान के सहयोगी हूथी विद्रोही, जिन्होंने गाजा पर इजराइल के नरसंहार वाले युद्ध की शुरुआत के बाद दो साल तक लाल सागर में जहाजों पर हमला करके अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था, वे अब तक मौजूदा संघर्ष से दूर रहे हैं। पर्यवेक्षक और खुद यमन के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक?

ट्रिगर पर हैं हाथ, सही समय का इंतजार

हूथी प्रमुख अब्दुल-मलिक अल-हूथी ने पहले कहा था कि उनके समूह के हाथ ट्रिगर पर हैं, और उन्होंने सही समय पर कार्रवाई करने का वादा किया था। ईरान के एक सैन्य अधिकारी ने 21 मार्च को देश की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' को बताया कि खारग द्वीप पर ईरान की तेल सुविधाओं के खिलाफ अमेरिका की कोई भी आक्रामकता तेहरान के लिए लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (जो यमन के पश्चिम में, लाल सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित है) को अस्थिर करने का रास्ता खोल देगी।

आर्थिक और मानवता के लिए विनाशकारी होंगे परिणाम

विश्लेषकों ने अल जजीरा को बताया कि बाब अल-मंडेब की नाकेबंदी-जो लाल सागर को वैश्विक व्यापार मार्गों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है-ऊर्जा बाज़ार को और अधिक अस्थिर कर देगी; लेकिन यमन के लिए इसके सैन्य, आर्थिक और मानवीय परिणाम भी उतने ही विनाशकारी और भारी पड़ सकते हैं।

खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधा और बंदरगाह निशाने पर

यमन के अबाद स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर के प्रमुख अब्दुलसलाम मोहम्मद ने अल जज़ीरा को बताया कि यदि हूथी ईरान के समर्थन में इस युद्ध में शामिल होते हैं, तो उनका मुख्य निशाना खाड़ी देशों में ऊर्जा सुविधाओं और बंदरगाहों पर हमला करना, तथा बाब अल-मंडेब से जहाजों को गुजरने से रोकना होगा।