Landslide Disaster: इथियोपिया में भारी बारिश के चलते आए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है और 125 से अधिक लोग लापता हैं, जिनके लिए सघन रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
Massive Landslide: अफ्रीकी देश इथियोपिया (Ethiopia) में कुदरत ने खौफनाक तबाही मचाई है। यहां एक भीषण प्राकृतिक आपदा (Massive Landslide) ने दर्जनों हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। मूसलाधार बारिश के बाद एक विशाल पहाड़ का हिस्सा अचानक ढह गया (Ethiopia Landslide), जिसकी चपेट में कई रिहाइशी इलाके आ गए। इस दिल दहला देने वाली घटना में अब तक कम से कम 50 लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। सबसे डरावनी बात यह है कि 125 से अधिक लोग अब भी भारी मलबे (Gofa Zone Landslide) के नीचे दबे हुए हैं (Missing People Ethiopia), जिससे मृतकों का यह आंकड़ा और भी भयावह रूप ले सकता है।
प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, यह भयानक हादसा दक्षिणी इथियोपिया के गोफा जोन (Gofa Zone) में हुआ है। पिछले कई दिनों से इस पहाड़ी क्षेत्र में रुक-रुक कर भारी बारिश हो रही थी। लगातार जलभराव और तेज बारिश के कारण पहाड़ों की पकड़ कमजोर हो गई और मिट्टी पूरी तरह से धंस गई। जब लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक मिट्टी का एक विशाल रेला उनके ऊपर आ गिरा। पलक झपकते ही पूरा इलाका कीचड़ और मलबे के ऊंचे ढेर में तब्दील हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य (Rescue Operations) युद्ध स्तर पर शुरू कर दिए गए। स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मिलकर मलबे में दबी जिंदगियों को तलाशने में जुटी हैं। हालांकि, लगातार खराब मौसम, दलदल और भूस्खलन के ताजा खतरों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई दुर्गम जगहों पर भारी मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे लोगों को केवल हाथों और फावड़ों की मदद से सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।
यह हादसा इस बात का बड़ा संकेत है कि अनियोजित बसावट और बदलता मौसम कितना विनाशकारी हो सकता है। इथियोपिया का यह क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। फिलहाल, पूरा देश इस भीषण त्रासदी के शोक में डूबा हुआ है और अपनों की तलाश में लोग मलबे के ढेर के पास उम्मीद भरी निगाहों से बैठे हैं।
इस दर्दनाक हादसे पर इथियोपियाई सरकार और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। स्थानीय नेताओं ने इसे एक भयंकर राष्ट्रीय त्रासदी करार देते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। रेड क्रॉस और अन्य वैश्विक राहत एजेंसियों ने फौरी तौर पर मेडिकल सहायता, भोजन और टेंट भेजने की घोषणा की है।
मलबे में दबे 125 लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए अब अतिरिक्त बचाव दस्तों को मौके पर भेजा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इलाके में और अधिक बारिश होने का अलर्ट जारी किया है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से हर घंटे मृतकों और घायलों की नई सूची अपडेट की जा रही है।
यह आपदा सिर्फ एक दिन की बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि उस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के भयानक असर की ओर भी इशारा करती है। बेतरतीब तरीके से पहाड़ों पर पेड़ों की कटाई और ढलानों पर बढ़ती इंसानी आबादी ने मिट्टी के कटाव को बढ़ा दिया है। इससे ऐसे खतरनाक भूस्खलन की घटनाएं अफ्रीका के इन हिस्सों में अब आम होती जा रही हैं।