विदेश

अमेरिका के बिना भी चलेगा NATO, यूरोप ने चुपचाप बना लिया बैकअप प्लान, ट्रंप नहीं तो कौन करेगा रक्षा?

स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय देश अनौपचारिक डिनर मीटिंग्स में इस योजना पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि अमेरिका के बिना भी नाटो प्रभावी रहे।
2 min read
Apr 15, 2026
Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो-IANS)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) कई बार नाटो से अलग होने की धमकी दे चुके हैं। इसके बाद, यूरोप ने चुपचाप एक ऐसा बैकअप प्लान तैयार किया है, जिससे अमेरिका के जाने के बाद भी नाटो पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक बड़ा खुलासा किया है। ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि यूरोप के बड़े देश पिछले कुछ समय से एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसे वो आपस में 'European NATO" कह रहे हैं। यह कोई औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि अभी तक यह सब डिनर मीटिंग्स और अनौपचारिक बातचीत में चल रहा है।

क्या है मकसद?

इसका मकसद साफ है। अगर अमेरिका किसी दिन नाटो से पीछे हट जाए तो यूरोप के पास अपनी सुरक्षा का इंतजाम होना चाहिए। अमेरिका पर निर्भरता कम करनी होगी और यूरोपीय देशों को खुद कमान संभालनी होगी।

ट्रंप की वो बातें जिन्होंने डराया यूरोप को

पिछले कुछ समय में ट्रंप ने कई ऐसे बयान दिए जिन्होंने यूरोप की नींद उड़ा दी। ट्रंप ने नाटो को 'पेपर टाइगर' यानी कागजी शेर कह दिया। डेनमार्क से ग्रीनलैंड छीनने की धमकी दी।

यूक्रेन युद्ध में अमेरिका का रुख इतना उलझा हुआ था कि यूरोप को समझ नहीं आ रहा था कि ट्रंप पीड़ित के साथ हैं या हमलावर के साथ।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने पिछले साल यह मान लिया था कि ट्रंप यूक्रेन को छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्हें लगा कि अमेरिकी नीति में अब कोई स्पष्ट मूल्य नहीं बचे हैं। यही वो पल था जब जर्मनी भी इस नई सोच की तरफ मुड़ा।

जर्मनी का पलटना क्यों है सबसे बड़ी बात?

यूरोप में फ्रांस लंबे समय से कहता आया है कि यूरोप को अपनी रक्षा खुद करनी चाहिए। लेकिन जर्मनी हमेशा इसका विरोध करता था। वजह यह थी कि बर्लिन में अमेरिकी परमाणु हथियार रखे हैं।

जर्मनी नहीं चाहता था कि अमेरिका के साथ कोई तनाव हो। लेकिन मेर्ज के आने के बाद जर्मनी की सोच बदली। और जब जर्मनी बदला तो पूरे यूरोप का समीकरण बदल गया। अब ब्रिटेन, फ्रांस, पोलैंड, नॉर्डिक देश और यहां तक कि कनाडा भी इस योजना के साथ खड़े हैं।

क्या होगा इस 'European NATO' में?

यह कोई अलग संगठन नहीं बनाया जा रहा। मौजूदा नाटो को ही यूरोपीय रंग देने की कोशिश है। इस योजना में कई व्यावहारिक सवालों पर काम हो रहा है।

जैसे कि अगर अमेरिकी अधिकारी हट जाएं तो NATO की हवाई और मिसाइल सुरक्षा कौन संभालेगा। पोलैंड और बाल्टिक देशों तक सेना पहुंचाने के रास्ते कौन से होंगे। रसद और सप्लाई का इंतजाम कैसे होगा। बड़े सैन्य अभ्यास कौन आयोजित करेगा।

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब्ब जो इस पूरी योजना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, उन्होंने कहा कि अमेरिका से यूरोप की तरफ बोझ का यह बदलाव हो रहा है और होता रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सबसे जरूरी यह है कि यह बदलाव समझदारी से और नियंत्रित तरीके से हो, न कि अचानक झटके से। यूरोप अभी भी अमेरिका को साथ चाहता है। लेकिन अगर अमेरिका न रहे तो यूरोप अंधेरे में नहीं बैठेगा।

Updated on:
15 Apr 2026 02:04 pm
Published on:
15 Apr 2026 02:04 pm