
बेंजामिन नेतन्याहू। (फोटो-IANS)
दुनिया के 10 देशों ने इजराइल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साथ ही इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लिए बिना सख्त हिदायत भी दे डाली है।
दरअसल, इजराइल ने हाल ही में लेबनान में खतरनाक हमलों के बाद हताहत लोगों की जान बचाने वाले संयुक्त राष्ट्र के राहतकर्मियों को निशाना बनाया था, जिसमें कई बचावकर्मियों की जान चली गई। इसी मामले को लेकर दुनिया के 10 देश इजराइल पर बुरी तरह से उखड़ गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, सिएरा लियोन, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन ने मिलकर मंगलवार को एक साझा बयान जारी किया। यह बयान कनाडा की राजधानी ओटावा से आया।
इन देशों ने कहा कि लेबनान में जो हालात हैं वो बेहद चिंताजनक हैं। वहां आम लोग बेघर हो रहे हैं, मानवीय संकट गहराता जा रहा है और जो लोग मदद करने जाते हैं उन पर भी हमले हो रहे हैं।
इस पूरे बयान में सबसे तीखा हिस्सा वो था जहां इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षकों यानी UNIFIL के जवानों की हत्या की निंदा की। बयान में कहा गया कि जिन लोगों को मारा गया है उनके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।
बता दें कि 7 अप्रैल को इजराइल की सेना ने UNIFIL के एक शांतिरक्षक को रोककर हिरासत में ले लिया था। UNIFIL के आला अधिकारियों की तत्काल दखलअंदाजी के बाद उसे एक घंटे में छोड़ा गया। लेकिन यह घटना ही बताती है कि हालात किस कदर बिगड़ चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र के किसी भी शांतिरक्षक को हिरासत में लेना अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है। और उनके काम में रुकावट डालना संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन है।
दक्षिणी लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच आमना-सामना जारी है। इस लड़ाई में आम नागरिक तो पिस ही रहे हैं, लेकिन जो लोग उनकी मदद के लिए वहां पहुंचते हैं वो भी सुरक्षित नहीं हैं।
10 देशों के इस बयान में साफ कहा गया कि नागरिकों और नागरिक ढांचे को हर हाल में बचाना होगा। और जो लोग सबसे कमजोर लोगों की मदद के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी पक्षों की है।
इन देशों ने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हुए सीजफायर का स्वागत किया। लेकिन साथ ही कहा कि लेबनान में लड़ाई अभी भी जारी है और वहां भी तुरंत युद्ध रोकना जरूरी है। बयान में कहा गया- हम लेबनान में लड़ाई तुरंत खत्म करने की मांग करते हैं।
इन 10 देशों ने एक और अहम बात याद दिलाई। सितंबर 2025 में 100 से ज्यादा देशों ने मिलकर एक घोषणापत्र पर दस्तखत किए थे जिसमें युद्ध क्षेत्रों में राहतकर्मियों की सुरक्षा को मजबूत करने की बात थी। यह नया बयान उसी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है।
बयान में आगे कहा गया- हम मिलकर यह सुनिश्चित करते रहेंगे कि जो लोग दूसरों की जान बचाने जाते हैं उन्हें अपनी जान न गंवानी पड़े। यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है। यह उन हजारों राहतकर्मियों के लिए एक उम्मीद की आवाज है जो आज भी मलबे और बमों के बीच काम कर रहे हैं।
Updated on:
15 Apr 2026 12:40 pm
Published on:
15 Apr 2026 12:40 pm
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