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इस्लामी कट्टरपंथी का मकसद मौत और तबाही, फ्लाईदुबई घटना पर इजराइल की पूर्व डिप्टी विदेश मंत्री की चेतावनी

फ्लाईदुबई कॉकपिट घटना पर इजराइल की पूर्व डिप्टी विदेश मंत्री शैरेन हास्केल ने बड़ा दावा किया। उन्होंने 9/11 जैसी त्रासदी की आशंका और IRGC कनेक्शन की जांच पर बात की।
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Oct 03, 2026
Islamic extremism
इजराइल की पूर्व डिप्टी विदेश मंत्री शैरेन हास्केल ने फ्लाईदुबई कॉकपिट हमले को 9/11 जैसी तबाही बताया, photo- ANI

Flydubai Cockpit Incident: इजराइल की पूर्व डिप्टी विदेश मंत्री शैरेन हास्केल ने चेतावनी दी कि फ्लाईदुबई कॉकपिट पर हुआ हमला तेल अवीव में 9/11 स्टाइल की तबाही में बदल सकता था। उनके बयान से अंतरराष्ट्रीय नेताओं के उन शुरुआती बयानों को बल मिला है, जिनमें हमलावर को-पायलट और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच संभावित संबंध का सुझाव दिया गया था।

ANI से बातचीत में हास्केल ने कहा कि संकेत कट्टरपंथी ईरानी सरकारी ताकतों से सीधे संबंधों की ओर इशारा करते हैं।हास्केल ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जो कहा है, उससे ऐसा लगता है कि IRGC, ईरानी कट्टरपंथी ताकतों से संबंध हो सकते हैं। यह गंभीर है। यह बहुत खतरनाक है और इसे रोकना होगा।

विमान में 23 बच्चे भी थे सवार

उन्होंने कहा कि अगर फ्लाइट डेक में दखल न दिया जाता, तो विमान इज़राइली शहरों या आबादी वाले इंफ्रास्ट्रक्चर से टकरा सकता था। हास्केल बोलीं, अगर कैप्टन स्मिथ और उन बहादुर इजराइलियों ने विमान पर कब्जा नहीं किया होता, तो यात्री मारे गए होते, जिनमें 23 बच्चे भी शामिल थे। क्या आप सोच सकते हैं कि वह कितनी बड़ी त्रासदी हो सकती थी?

पिछले तीन सालों में बढ़ी कट्टरपंथी ताकतों की हिम्मत

हास्केल ने कहा कि पिछले तीन सालों में कट्टर इस्लामिस्ट ताकतों ने सिर उठाया है और उन्हें ऐसी आतंकी कार्रवाइयों की हिम्मत मिली है, जो कल्पना से परे हैं। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा में हिंदुओं, यहूदियों, ईसाइयों, कुर्दों, अलावी और ड्रूज सहित सभी गैर-मुस्लिम आबादी को निशाना बनाना शामिल है।

कमजोर ईरान ढूंढ रहा क्रिएटिव तरीके

हास्केल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में ईरान ने अपनी बहुत ताकत और असर खोया है, इसलिए वह ऐसे कामों की तलाश में है जिनसे कुछ ताकत लौट सके। उन्होंने कहा कि इजराइल को ज्यादा इंटेलिजेंस जुटानी होगी और लीक से हटकर सोचना होगा।

क्या नॉर्मलाइजेशन समझौते थे निशाना?

यह पूछे जाने पर कि क्या हमले का मकसद क्षेत्रीय नॉर्मलाइज़ेशन समझौतों को रोकना था, हास्केल ने कहा कि इजराइल की साझेदारियों को तोड़ना तेहरान का पहला मकसद रहा है। उन्होंने 7 अक्टूबर का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज भी ईरानी शासन का यही मकसद है, पर यह कामयाब नहीं होगा। उनके मुताबिक ईरानी आक्रामकता क्षेत्रीय देशों को इजराइल के और करीब ला रही है।

Updated on:
03 Oct 2026 12:57 am
Published on:
03 Oct 2026 12:56 am